विरोध बूचड़खाने का: यदि बना तो हर दिन कटेंगी 1000 भैंस व 5000 बकरा-बकरियां, सीहोर में ग्रामीणों ने खोला मोर्चा

Spread the love

सीहोर जिले के दोराहा क्षेत्र के ग्राम सतपोन में एक बड़े बूचड़खाने के निर्माण की खबर सामने आते ही पूरे इलाके में गुस्से की लहर दौड़ गई। ग्रामीणों का आरोप है कि प्रतिदिन 1000 भैंसें और 5000 तक बकरा-बकरियां काटे जाने की तैयारी चल रही है। यह निर्माण गांव की धार्मिक, सामाजिक और सांस्कृतिक भावनाओं के खिलाफ बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि बिना अनुमति के, धोखे से और गुप्त तरीके से निर्माण का कार्य किया जा रहा है।

 

कलेक्ट्रेट पर नारेबाज़ी, पांच दिन का अल्टीमेटम
मंगलवार को हजारों ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे और जोरदार नारेबाजी करते हुए बूचड़खाने को तत्काल बंद करने की मांग की। प्रदर्शनकारियों में जिला सरपंच संघ के जिलाध्यक्ष एलम सिंह दांगी, भाजपा मंडल अध्यक्ष सुरेश विश्वकर्मा सहित कई जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि यदि पांच दिनों में निर्माण नहीं रोका गया तो हजारों लोग सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेंगे।

 

ग्रामीणों का आरोप-धोखे से ली गई अनुमति
ग्रामीणों ने मुख्यमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में बड़ा आरोप लगाया कि कंपनी एस.ए.जी फूड्स एक्सपोर्ट प्रा. लि. ने पंजीयन और अनुमतियों में भारी फर्जीवाड़ा किया है। फल-सब्जी संरक्षण यूनिट बताकर अनापत्ति प्रमाण पत्र लिया, लेकिन वास्तविकता में बूचड़खाना बनाया जा रहा है। ग्राम सभा ने धोखे का पता लगने पर पूर्व अनुमति को रद्द कर दिया है, इसके बावजूद निर्माण जारी है। ग्रामीणों ने इसे कानून और पंचायत अधिकारों का खुला उल्लंघन बताया।

प्रदूषण, बदबू और बीमारियों का डर सताने लगा
ग्रामीणों ने कहा कि रोजाना सैकड़ों जानवर काटे जाने से खून, चमड़ा और हड्डियों का भारी कचरा निकलेगा, जिससे हवा और पानी दूषित होगा। बदबू असहनीय होगी और बच्चों-बुजुर्गों के लिए स्वास्थ्य संकट पैदा होगा। पशु-अपशिष्ट के कारण गंभीर महामारी फैलने की आशंका जताई गई। ग्रामीणों का कहना है कि हम अपने परिवार-बच्चों को बीमारियों की आग में नहीं झोंक सकते।

सामाजिक माहौल पर खतरे की आशंका
ग्रामीणों के अनुसार बूचड़खाना केवल स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि सामाजिक तनाव और अशांति का कारण भी बन सकता है। धार्मिक रूप से संवेदनशील क्षेत्र में ऐसे बड़े बूचड़खाने का निर्माण गांव में वैमनस्य, विवाद और संघर्ष को जन्म देगा। लोगों ने कहा कि आज जब पूरा देश शांति की राह पर है, तब सीहोर में ऐसे निर्माण की अनुमति देना समाज के बीच खाई पैदा करने जैसा है।

और पढ़े  इस्राइली PM नेतन्याहू ने पहनी भारतीय पोशाक, हिंदी में दिया खास संदेश

यह लड़ाई जमीन, गांव और आने वाली पीढ़ियों की है
ग्रामीणों ने कहा कि गांव की संस्कृति, पर्यावरण और सुरक्षा बचाने के लिए वे किसी भी स्तर तक संघर्ष करेंगे। उन्होंने दो टूक कहा कि यह जमीन सिर्फ खेतों की नहीं, हमारी आस्था की है… बूचड़खाना नहीं बनने देंगे, चाहे कितनी भी बड़ी चुनौती सामने आए।
अंत में ग्रामीणों ने अनुरोध किया कि प्रशासन तत्काल निर्माण रोककर जांच कराए, अन्यथा आंदोलन की ज़िम्मेदारी प्रशासन पर होगी।


Spread the love
  • Related Posts

    जारी है साल का पहला चंद्र ग्रहण, जानिए ग्रहण काल में क्या करें और राशियों पर कैसा होगा असर

    Spread the love

    Spread the love     साल का पहला चंद्र ग्रहण जारी है। ग्रहण की शुरुआत दोपहर 3 बजकर 20 मिनट से हो चुका है। यह ग्रहण शाम 6 बजकर 47…


    Spread the love

    नितिन नवीन समेत BJP के नौ राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची जारी देखें

    Spread the love

    Spread the loveभाजपा ने अपने राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को बिहार से राज्यसभा का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इसके बाद उनकी आवाज संसद से पूरे देश में सुनी जाएगी।…


    Spread the love