60 से 70 हजार रुपये एंबुलेंस का किराया, इसलिए पिता के शव को घर नहीं ले जा सका बेटा,आगरा में किया अंतिम संस्कार

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दिल्ली और उत्तरप्रदेश घूमने आए तमिलनाडु के शिवराज (87) आगरा कैंट स्टेशन पर दल के लोगों से बिछड़ गए। दो दिन पहले न्यू आगरा के अबुल उलाह दरगाह के पास उनका शव मिला।

तमिलनाडु के कोयंबटूर से 16 सदस्यीय लोगों का समूह दिल्ली, आगरा और वाराणसी की यात्रा पर आया था। इनमें शिवराज भी शामिल थे। ताजमहल देखने के बाद वह अपने दल आगरा कैंट स्टेशन पर बिछड़ गए। 11 जून को उनका शव मिला। उनके कपड़ों में मिली पर्ची पर मोबाइल नंबर लिखा था।

 

पुलिस ने उस नंबर पर कॉल किया तो मोबाइल बंद मिला था। शव को पोस्टमार्टम गृह में रखवा दिया। पुलिस ने नंबर से डिटेल निकलवाई। इसके बाद परिवार को सूचना दी गई। शुक्रवार को शिवराज के बेटे रमेश और धेवता आलगू आगरा आए। पोस्टमार्टम गृह पहुंच शव की पहचान की।

एक ही दर्द, अंतिम दर्शन नहीं कर सका परिवार
रमेश ने बताया कि पिता करीब पांच जून को घूमने के लिए घर से निकले थे। आगरा पुलिस से पिता के मृत होने की सूचना मिली। वह उनके शव को अपने घर ले जाना चाहते थे। निजी एंबुलेंस के चालक 60 से 70 हजार रुपये मांग रहे थे। इस वजह से अंतिम संस्कार आगरा में ही करने का निर्णय लिया। एक ही दर्द था कि परिवार अंतिम दर्शन नहीं कर सका।

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