2026 चुनाव: बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में अप्रैल में होंगे चुनाव, जानें कब तक होगा तारीखों का एलान

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चार राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल व केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में विधानसभा के चुनाव अप्रैल में हो सकते हैं।  निर्वाचन आयोग चुनाव कार्यक्रम की घोषणा मार्च के दूसरे सप्ताह में कर सकता है। असम में इस बार एक चरण में चुनाव होने की उम्मीद है।

अधिकारियों ने बताया कि पुडुचेरी में विधानसभा का कार्यकाल 15 जून को, जबकि असम, केरल, तमिलनाडु व पश्चिम बंगाल में क्रमश: मई 20, 23, 10 और 7 को पूरे हो रहे हैं। इन राज्यों में चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए आयोग के अधिकारियों ने दौरे शुरू कर दिए हैं।

बंगाल में क्या ‘दीदी’ को पटखनी दे पाएगी भाजपा?
2026 के विधानसभा चुनावों को लेकर पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु और केरल में सियासी मुकाबला स्पष्ट होता जा रहा है। पश्चिम बंगाल में मुख्य टक्कर तृणमूल कांग्रेस और भाजपा के बीच मानी जा रही है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के नेतृत्व में टीएमसी लगातार चौथी बार सत्ता में वापसी की कोशिश में है। वहीं भाजपा राज्य में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए पूरी ताकत झोंक रही है। कांग्रेस और वाम दल भी चुनाव लड़ने की तैयारी में है, लेकिन सीधी लड़ाई टीएमसी और भाजपा के बीच ही मानी जा रही है।

असम में भाजपा और कांग्रेस के बीच मुकाबला
असम में मुकाबला मुख्य रूप से भाजपा और कांग्रेस के बीच है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा के नेतृत्व में भाजपा दोबारा बहुमत हासिल करने के लक्ष्य के साथ मैदान में है, जबकि कांग्रेस सत्ता विरोधी माहौल का फायदा उठाने की कोशिश कर रही है। राज्य में अन्य क्षेत्रीय दल भी सक्रिय हैं, लेकिन चुनाव का केंद्र भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधी प्रतिस्पर्धा पर ही टिका है।

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तमिलनाडु में क्या भाजपा तैयार कर पाएगी सियासी जमीन?
तमिलनाडु में राजनीतिक लड़ाई द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के नेतृत्व वाले गठबंधन और भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन में शामिल ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के बीच है। इंडिया गुट में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली डीएमके सरकार सत्ता में वापसी की कोशिश में है। वहीं, एआईएडीएमके और भाजपा समेत उसके तमाम सहयोगी दल कड़ी चुनौती देने की हुंकार भर रहे हैं। भाजपा भी गठबंधन राजनीति के जरिए अपनी मौजूदगी मजबूत करने में जुटी है।

केरल में किसके बीच मुकाबला?
केरल में पारंपरिक रूप से दो मोर्चों के बीच सीधी टक्कर रहती है और इस बार भी वही स्थिति है। सीपीआई(एम) के नेतृत्व वाले एलडीएफ और कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूडीएफ चुनावी मैदान में आमने सामने हैं। वाम मोर्चा लगातार दूसरी बार सत्ता में है और तीसरी बार जीत का प्रयास कर रहा है। वहीं, यूडीएफ सत्ता में वापसी के लिए आक्रामक रणनीति अपना रहा है।

राज्य और उनकी विधानसभा सीटों की संख्या
पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली सरकार है। बंगाल में कुल 294 विधानसभा सीटें हैं। वहीं, असम में भाजपा नेता हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में सरकार चल रही है। इस चुनावी राज्य में 126 विधानसभा सीटें हैं। तमिलनाडु में द्रविड मुनेत्र कड़गम के प्रमुख एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली सरकार है। तमिलनाडु में विधानसभा सीटों की संख्या 234 है। वहीं, केरल में वाम दल के नेता पिनरई विजयन के नेतृत्व वाली सरकार है। केरल में 140 विधानसभा सीटे हैं

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चुनाव आयोग के निर्देश पर बंगाल में पांच अधिकारियों पर एफआईआर
इस बीच चुनाव आयोग की तय समय सीमा से कुछ घंटे पहले पश्चिम बंगाल सरकार ने मतदाता सूची संशोधन से जुड़े गंभीर अनियमितताओं के मामले में पांच अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की। आयोग ने छह महीने पहले इन अधिकारियों पर आपराधिक मामला दर्ज करने का निर्देश दिया था। आरोप है कि दक्षिण 24 परगना के बरुईपुर ईस्ट व ईस्ट मेदिनीपुर के मोयना विधानसभा क्षेत्रों में 100 से अधिक फर्जी नाम मतदाता सूची में जोड़े गए।

जिन अधिकारियों पर कार्रवाई हुई उनमें बरुईपुर ईस्ट के निर्वाचक निबंधन अधिकारी देबोत्तम दत्ता चौधरी, सहायक निर्वाचक निबंधन अधिकारी तथागत मंडल, मोयना के बिप्लब सरकार व सुदीप्त दास तथा डाटा एंट्री ऑपरेटर सुरोजीत हल्दर शामिल हैं। इन पर लॉग-इन विवरण साझा करने और अवैध तरीके से नाम जोड़ने के आरोप हैं।


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