2025 हिंदी दिवस- हल्द्वानी: हम आजकल हिंदी बोलने में लज्जित होते है.., अंग्रेजी में बोलें तो बढ़ती शान

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 हिंदी दिवस की पूर्व संध्या पर सनातन धर्म संस्कृत महाविद्यालय में वर्तमान परिप्रेक्ष्य में हिंदी का महत्व विषय पर विचार गोष्ठी आयोजित की गई। इसमें विद्वानों ने हिंदी भाषा का अधिकतम प्रयोग करने पर बल दिया।

कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। महाविद्यालय के विद्यार्थियों ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। मुख्य अतिथि लेखिका डॉ. प्रभा पंत ने कहा कि हिंदी, हिंदुस्तान की ही नहीं बल्कि विश्व की प्रिय भाषा बनने की ओर अग्रसर है। विशिष्ट अतिथि शिक्षक विपिन चंद्र पढालनी ने कहा कि हिंदी हमारे जीवन की मार्गदर्शिका है। एडवोकेट जगदीश चंद्र बेलवाल ने कहा कि हिंदी का प्रचार-प्रसार करना हम सभी की जिम्मेदारी है। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए मोहन गिरी गोस्वामी ने कहा कि वर्तमान में भारत में अंग्रेजी विद्यालयों में हिंदी भाषा पर अधिक ध्यान नहीं दिया जा रहा है। वक्ता अशोक वार्ष्णेय ने कहा कि हिंदी बोलने से हम लज्जित होते, अंग्रेजी में बोलें तो बढ़ती शान। कार्यक्रम में आधारशिला के संपादक स्व. दिवाकर भट्ट को श्रद्धांजलि दी गई। प्राचार्य मनोज कुमार पांडेय ने कहा कि हिंदी केवल भाषा ही नहीं, यह हमें संस्कारित भी करती है। इस अवसर पर हिंदी के प्रखर विद्वान विपिन पढालनी को शाल ओढ़ाकर सम्मानित किया गया। संचालन आचार्य साकेत पाठक ने किया। वहां डॉ. अमित भारद्वाज, शिवानी भारद्वाज, जानकी त्रिपाठी, नारायण दत्त थुवाल, मोहित जोशी, दीप चंद्र जोशी, रजनी बेलवाल, कीर्ति चंद्र कलोनी, शुभम पाठक, भुवन चन्द्र जोशी आदि मौजूद रहे।


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