दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से सुरक्षात्मक उपायों को लगातार प्रयोग में लाते रहने की अपील कर रहे हैं। कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनने, हाथों की स्वच्छता का ध्यान रखने और सोशल डिस्टेंसिंग नियमों के पालन पर जोर दिया जा रहा है। पिछले डेढ़ साल से जारी कोरोना के कहर के चलते अब मास्क पहनना लोगों की आदत का हिस्सा बन चुका है, पर क्या हर तरीके का मास्क संक्रमण से सुरक्षा दे सकता है? क्या आप जानते हैं, कि जो मास्क लगा रहे हैं, वह संक्रमण से सुरक्षित रखने में कितना प्रभावी है? इसी से संबंधित हाल ही में किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने नीले रंग के सर्जिकल मास्क को लेकर बड़ा खुलासा किया है। अध्ययन में वैज्ञानिकों ने इस तरह के मास्क को कोरोना से सुरक्षा देने में अप्रभावी बताया है।
कनाडा में वाटरलू विश्वविद्यालय द्वारा किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि महामारी के दौरान अधिकांश लोगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले नीले रंग वाले सर्जिकल फेस मास्क को कोविड-19 संक्रमण से सुरक्षा देने में असरदान नहीं पाया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए लोगों को और दूसरे तरह के मास्क पहनने चाहिए, क्योंकि सर्जिकल फेस एरोसोल की बूंदों को रोकने में ज्यादा प्रभावी नहीं माने जा सकते हैं। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।
मास्क की प्रभाविकता को लेकर किए गए इस अध्ययन में शोधकर्ता बताते हैं, महामारी के दौरान लोकप्रिए हुए नीले सर्जिकल मास्क को केवल 10 फीसदी तक ही प्रभावी माना जा सकता है, इसका मुख्य कारण यह है कि इस तरीके के मास्क चेहरे को अच्छी तरह से ढक नहीं पाते हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि जिस तरह से कोरोना के नए और अधिक संक्रामक वैरिएंट्स के बारे में पता चल रहा है, ऐसे में लोगों के लिए मास्क पहनना बेहद आवश्यक है। एन95 और केएन95 जैसे मास्क अधिक प्रभावी ढंग से कोरोना से सुरक्षा दे सकते हैं।
विश्वविद्यालय में मेक्ट्रोनिक्स इंजीनियरिंग के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख डॉ सेरही यारुसेविच कहते हैं, इसमें कोई संदेह नहीं है कि संक्रमण से बचाव के लिए चेहरे को अच्छी तरह से कवर करना सबसे आवश्यक है, हालांकि जब बात एरोसोल को नियंत्रित करने की आती है तो विभिन्न मास्क की प्रभावशीलता में बड़ा अंतर देखने को मिला है। बहुत से लोग ऐसे मास्क पहनते हैं जो उनके चेहरे पर ठीक से फिट नहीं होते हैं। ऐसी स्थिति में एरोसोल की बूंदें बाहर आ सकती हैं, जिससे लोगों को संक्रमण हो सकता है। नीले सर्जिकल मास्क को इसी आधार पर संक्रमण से सुरक्षा देनें में फिट नहीं पाया गया है। अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि सर्जिकल मास्क की तुलना में एन95 मास्क को एरोसोल की बूंदों को फिल्टर करने में अधिक सक्षम पाया गया है। प्रोफेसर यारुसेविच कहते हैं, यह सामान्य सी बात है कि जो मास्क नाक और मुंह को अच्छी तरह से कवर करेगा उसे संक्रमण से सुरक्षा देने में ज्यादा कारगर माना जा सकता है। लोगों को यदि उपलब्ध हो सके तो एन95 मास्क का प्रयोग अधिक करना चाहिए।







