कार्तिक मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पूजा का महापर्व शुरू हो गया है। शुद्धिकरण के बाद सभी ने नए वस्त्र पहने और शाम को नमक वाला भोजन किया। मंगलवार को पंचमी के दिन शाम को सूर्यास्त के बाद खरना में मीठी खीर का भोग लगाया जाएगा और उसी प्रसाद को खाने के बाद महिलाओं का 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू होगा।
छठ पूजा का मुख्य कार्यक्रम 10 नवंबर को होगा जिसमें सूर्यास्त के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। 11 नवंबर को सप्तमी के दिन उगते सूरज को अर्घ्य देकर छठ पूजा का समापन होगा। इधर रामपुर रोड स्थित छठ स्थल में सफाई का काम पूरा हो गया है। सोमवार को पेंटिंग का काम भी पूरा कर लिया गया। पूजा के लिए 19 वेदियां बनाई गई हैं जिसमें 17 वेदी पुरानी और दो नई वेदी बनाई गई है। नहर में सफाई का काम सोमवार को भी जारी रहा। रविवार को नगर निगम के कर्मचारियों ने सफाई की और सोमवार को समिति सदस्यों ने नहर में सफाई का काम किया। छठ सेवा समिति के उपाध्यक्ष शंकर भगत ने बताया कि छठ पर्व धूमधाम से मनाया जाएगा।
संतान सुख प्रदान करने वाला पर्व
हल्द्वानी। छठ पर्व के बारे में माना जाता है कि यह पर्व संतान सुख प्रदान करने वाला है। इस पर्व की एक कथा के अनुसार सूर्य की बहन षष्ठी देवी नवजात बच्चों की रक्षा करती है। इसलिए माताएं इस पर्व को अपनी संतान की लंबी उम्र और उन्नति के लिए व्रत रखती हैं। छठ व्रत का संबंध सूर्य से भी है। सूर्य की प्रसन्नता सृष्टि को बनाए रखने के लिए जरूरी है इसलिए छठ पर्व पर सूर्य की पूजा होती है।









