चमोली / उत्तराखंड : सिर पर चुनावों के वक्त कलमबंद हड़ताल पर गए राजस्व निरीक्षक व उप निरीक्षक।

राजस्व निरीक्षक और रजिस्ट्रार कानूनगो के पदों को एकीकृत न करने सहित चार सूत्रीय मांगों को लेकर बृहस्पतिवार से पर्वतीय राजस्व निरीक्षक,उप निरीक्षक व राजस्व सेवक संघ ने अनिश्चितकालीन कलमबंद हड़ताल शुरू कर दी है।इन बिंदुओं की मांग पर मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा है। उत्तराखंड में आगामी विधानसभा चुनाव सिर पर आ खड़ा हुआ है और पर्वतीय क्षेत्रों में चुनाव को निर्बाध रूप से संपन्न कराने में राजस्व विभाग की भूमिका ही बड़ी महत्वपूर्ण रहती आई है।तो ऐसे समय में राजस्व कर्मियों का हड़ताल पर चले जाने से सरकार की सिरदर्दी ही बढ़ाने वाली है। चुनावों की बात एक तरफ रख भी दें तो आम जनता को राजस्व संबंधी अभिलेखों,प्रमाण पत्रों आदि के लिए राजस्व कर्मियों की हड़ताल से तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। ऐसा मंजर शुक्रवार को तहसीलों में देखने को भी मिला जब ग्रामीण क्षेत्रों से तहसील आते लोगों को बिना काम हुए बैरंग ही घर लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा। राजस्व कर्मियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल को देखते हुए लगता है कि अगर सरकार ने इनकी मांगों पर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया तो जनता और भी परेशान हो सकती है।

राजस्व कर्मीयों का कहना है कि राजस्व निरीक्षक व रजिस्ट्रार कानूनगो के पदों को एकीकृत करने पर उन्होंने पहले ही आपत्ति जताई थी बाबजूद इसके एकीकरण का प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। इसके विरोध में राजस्व कर्मियों ने तहसील परिसरों में शासन प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की।

मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में कर्मचारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन देने,16 वें बैच के राजस्व निरीक्षक प्रशिक्षण व राजस्व निरीक्षक क्षेत्रों का पुनर्गठन करने, संवर्गीय कार्मिकों को उच्चीकृत वेतनमान का लाभ एक जनवरी 2006 से दिए जाने की मांग प्रमुखता से की है।

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