https://newbharat.net.in/wp-content/uploads/2021/05/InShot_20210517_143832565.mp4दलाईलामा के बाद तिब्बतियों के दूसरे सबसे बड़े धर्मगुरु 11वें पंचेन लामा को लापता हुए आज 17 मई 26 साल पूरे हो गए।
पीपुल्स रिपब्लिक आफ चाइना (पीआरसी) द्वारा मात्र छह वर्ष की आयु में ही अगवा कर लिया गया था। इसके बाद से आज तक दुनियाभर के तिब्बती समुदाय को उनके परिवार के विषय में कोई जानकारी नहीं है।
बता दें कि 11वें पंचेन लामा गेदुन छुयाकी नीमा का जन्म 25 अप्रैल 1989 को तिब्ब के लाहरी जिले में हुआ था।
धर्मगुरु दलाईलामा ने 14 मई 1995 को नीमा को महज 6 वर्ष की आयु में उन्हें 11वें पंचेन लामा के रूप में मनोनीत किया था।
इस घोषणा के तीन दिन के बाद ही यानि 17 मई 1995 को पंचेन लामा को पीआरसी ने परिवार समेत अगवा कर लिया था।
तब से हर वर्ष पंचेन लामा के जन्म दिन 25 अप्रैल को भी उनकी सलामती के लिए दुआएं मांगी जाती हैं जबकि 17 मई को उनकी रिहाई की मांग चीनी सरकार से की जाती है।
पंचेन लामा तिब्बत में लामाओं के पुनरावतारों में से एक हैं, जिनमें से प्रत्येक प्रभावशाली ताशिलहुंपो बौद्धमठ का प्रमुख होता है। हाल तक तिब्बती बौद्ध धर्म में प्रभुत्वपूर्ण गेलुग् पा मत में दलाई लामा के बाद दूसरी आध्यात्मिक शक्ति थे। उपाधि ‘पंचेन’ ताशिलहुंपो मठ के उन प्रमुख मठाधीशों को पांरपरिक रूप में दी जाती है, जिन्हें उनकी परिपक्वता और ज्ञान के आधार पर चुना जाता है।
अमरीका के विदेश मंत्री माइक पॉम्पियो ने कहा है कि चीन को जल्द से जल्द तिब्बती धार्मिक नेता पंचेन लामा के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए.
माइक पॉम्पियो ने यहाँ तक कहा कि 25 साल पहले चीनी अधिकारियों ने पंचेन लामा का अपहरण कर लिया था, जब वे सिर्फ़ छह साल के थे. अब वे 31 साल के हो गए हैं. अमरीकी विदेश मंत्री ने कहा कि चीन में सभी धर्मों को मानने वालों को बिना दखल के अपनी मान्यताओं को अपनाने की अनुमति होनी चाहिए.
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कैसे चीन तिब्बतियों की धार्मिक, भाषायी और सांस्कृतिक पहचान को अलग करने की कोशिश कर रहा है. कोरोना वायरस के संक्रमण के कारण परेशान अमरीका ने चीन को अब एक नए मुद्दे पर घेरना शुरू कर दिया है.
कौन हैं पंचेन लामा और क्या है विवाद
चीन ने जब 1995 में तिब्बती बौद्ध धर्म के दूसरे सबसे अहम व्यक्ति को छह साल की उम्र में अपने क़ब्ज़े में लिया तब उन्हें दुनिया का सबसे युवा राजनीतिक बंदी कहा गया था. 25 साल बाद भी उन्हें देखा नहीं गया है.
तिब्बती बौद्ध पुनर्जन्म (अवतार) में विश्वास रखते हैं. जब तिब्बती बौद्ध धर्म के दूसरे सबसे अहम व्यक्ति पंचेन लामा की 1989 में संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई (कुछ लोगों का मानना है कि चीन सरकार ने उन्हें ज़हर दिलवाया था) तो उनका अवतार जल्द ही होने की उम्मीद ज़ाहिर की गई.
14 मई 1995 को तिब्बती बौद्ध धर्म के प्रमुख दलाई लामा ने एन पंचेन लामा को पहचाने जाने की घोषणा की. छह साल के गेझुन चोएक्यी न्यीमा को पंचेन लामा का अवतार घोषित किया गया. वो तिब्बत के नाक्शु शहर के एक डॉक्टर और नर्स के बेटे थे.
चीनी प्रशासन को उम्मीद थी कि पंचेन लामा को बिना दलाई लामा के हस्तक्षेप के पहचान लिया जाएगा. दलाई लामा 1959 में तिब्बत छोड़कर भारत आ गए थे और तिब्बत की निर्वासित सरकार का गठन किया था.
चीनी सरकार ने न्यीमा और उनके परिवार को ही परिदृश्य से बाहर कर दिया और चीनी सरकार के प्रभाव वाले बौद्ध धर्मगुरुओं से ऐसे पंचेन लामा की पहचान करने के लिए कहा जो चीन के इशारे पर चले.
17 मई 1995 को चीन ने उन्हें अपने नियंत्रण में लिया और तब से ही उन्हें लोगों की नज़र से दूर रखा गया. एक बार एक अधिकारी ने साउथ चाइना मोर्निंग पोस्ट को बताया था कि वो उत्तरी चीन के गानझू में रह रहे हैं. एक थ्योरी ये भी है कि उन्हें या तो बीजिंग में या उसके आसपास रखा गया है.
अक्तूबर 2000 में तत्कालीन ब्रितानी विदेश मंत्री रॉबिन कुक ने संसद की सेलेक्ट समिति को बताया था, “हर बार जब हमने गेझुन चोएक्यी न्यीमा का सवाल उठाया…हमें चीन की सरकार ने ये भरोसा दिया कि उनकी सेहत अच्छी है और उनकी अच्छे से देखभाल की जा रही है और उनके परिजन अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप नहीं चाहते हैं.”







