लखीमपुर खीरी के तिकुनियां में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद के केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्र टेनी के गांव बनवीर पहुंचने की खबर पर रविवार को हजारों किसानों ने तिकुनियां कूच कर दिया और महाराजा अग्रसेन खेल मैदान में बने उस हेलिपैड स्थल पर कब्जा जमा लिया, जहां डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर उतरना था। लेकिन, किसानों के विरोध की सुगबुगाहट पर रविवार सुबह डिप्टी सीएम का कार्यक्रम बदल गया और सुबह साढ़े नौ बजे लखनऊ से सड़क मार्ग से चलकर दोपहर 12 बजे वह लखीमपुर पहुंचे।
उधर, तिकुनिया में नाराज किसानों ने डिप्टी सीएम के स्वागत में लगी होर्डिंग को उखाड़कर विरोध जताया। जानकारी है कि भाजपाइयों ने किसानों के ऊपर गाड़ी चढ़ा दी। इससे गुस्साए किसानों ने कई गाड़ियों में आग लगा दी। डीजीपी मुकुल गोयल ने बताया की इस घटना में दो किसानों के मौत की खबर है और एक घायल है। उन्होंने बताया वहां के मौजूदा हालात को देखते हुए एडीजी कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार को फौरन मौके पर पहुंचने के निर्देश दिए गए हैं।
लखीमपुर खीरी में किसानों के घायल होने की सूचना के बाद किसान नेता राकेश टिकैत ने कहा कि लखीमपुर से सैकड़ों किसान कार्यक्रम कर वापस लौट रहे थे तभी उन पर गाड़ी चढ़ाकर हमला किया गया, इसके बाद फायरिंग की गई। वह भारतीय किसान यूनियन के पदाधिकारी के साथ लखीमपुर के लिए रवाना हो गए। वहीं पुलिस प्रशासन ने एहतियात के तौर पर सुरक्षा बढ़ा दी है। एसपी सिटी सेकंड ज्ञानेंद्र सिंह और थाना प्रभारी सचिन मलिक फोर्स के साथ किसान नेता से बात करने पहुंचे हैं।
बता दें कि रविवार को दोपहर दो बजे डिप्टी सीएम केशव प्रसाद का तिकुनिया में हेलिकॉप्टर उतरने का कार्यक्रम था। लेकिन, इसकी सुगबुगाहट होने पर रविवार को सुबह ही पलिया, भीरा, बिजुआ, खजुरिया और संपूर्णानगर आदि जगहों से हजारों की संख्या में किसान हाथों में काला झंडा लेकर तिकुनियां पहुंच गए और महाराजा अग्रसेन खेल मैदान पर कब्जा जमा लिया।
यहीं, पर डिप्टी सीएम का हेलिकॉप्टर उतरना था। बाइक और कारों से पहुंचे हजारों किसानों ने वहां टेंट लगा दिया और सरकार विरोधी भाषणबाजी की। इस दौरान किसानों को संभालने में पुलिस के पसीने छूट गए। आसपास के थानों की पुलिस भी वहां लगाई गई है। जबकि, तिकुनिया में तैनात भीरा एसओ अजय राय ने बताया कि उनकी ड्यूटी तिकुनिया में लगी है। फोर्स लगातार किसानों को रोकने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन, किसान मुख्य मार्गों को छोड़कर गांवों के रास्ते से तिकुनियां पहुंच गए। हर चौराहे पर वह निगरानी रख रहे हैं।







