सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन की ओर से उत्तराखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश बनाए जाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ताओं के नाम प्रस्तावित किए जाने पर उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कड़ी आपत्ति जताई है। बार ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह औचित्यहीन बताते हुए खारिज करने योग्य बताया है।
उत्तराखंड हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने कहा है कि जिन तीन अधिवक्ताओं के नाम उत्तराखंड हाईकोर्ट में न्यायाधीश बनाने के लिए प्रस्तावित किए जा रहे हैं, उन लोगों ने आज तक उत्तराखंड हाईकोर्ट में प्रैक्टिस नहीं की है। वे न तो उत्तराखंड के निवासी हैं और ना ही इन लोगों को उत्तराखंड की राजनीतिक, भौगोलिक, ऐतिहासिक घटनाओं की समझ ही है, ऐसे में किसी अनुभवहीन का नाम न्यायाधीश बनाने के लिए भेजना गलत है।
हाईकोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अवतार सिंह रावत ने यहां एक पत्रकार वार्ता में कहा कि सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन को न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले पर नाम भेजने का अधिकार नहीं है। इसलिए जिन 48 लोगों के नाम विभिन्न उच्च न्यायालयों में जज बनाने के लिए भेजे गए हैं वे गलत हैं। बार अध्यक्ष ने कहा कि वह जल्द ही सुप्रीम कोर्ट व कोलेजियम को पत्र लिखकर विरोध दर्ज कराएंगे। उन्होंने कहा कि 1993 में उच्च न्यायालयों और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों के एक समूह को न्यायाधीशों के रूप में प्रोन्नत किए जाने योग्य अधिवक्ताओं को चिह्नित करने का अधिकार दिया गया था। इसलिए इस प्रकार की संस्तुति की कोई विधिक मान्यता नहीं है।








