राम मंदिर रामलला के गर्भगृह तक पहुंचेगी सूर्य की रोशनी, कोणार्क मंदिर जैसी तकनीक अपनाने पर ट्रस्ट कर रहा मंथन
अयोध्या में बन रहे राममंदिर में अनेक खूबियों के साथ-साथ रामलला के गर्भगृह को सूर्य की किरणों से जगमग करने की तैयारी है। इसके लिए ओडिशा के कोणार्क मंदिर जैसी स्पेशल तकनीक को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने इस बात की जानकारी दी है।
नई दिल्ली
अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण जोरों पर है। राममंदिर में अनेक खूबियों के साथ-साथ रामलला के गर्भगृह को सूर्य की किरणों से प्रकाशमय करने की तैयारी है। इसके लिए ओडिशा के कोणार्क मंदिर जैसी स्पेशल तकनीक को अपनाने पर विचार किया जा रहा है। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के सदस्य कामेश्वर चौपाल ने बताया कि भगवान राम के मंदिर में प्रत्येक रामनवमी पर गर्भगृह में सूर्य की किरणें रामलला को सुशोभित करें, ऐसे एक प्रस्ताव पर काम चल रहा है।
कामेश्वर चौपाल ने बताया कि राम मंदिर के गर्भगृह में रामलला की प्रतिमा स्थापित की जाएगी और हर रामनवमी पर गर्भगृह में रामलला की प्रतिमा तक सूर्य की किरणें सीधे पहुंचे, इसके लिए कुछ मॉडल पर वैज्ञानिकों, खगोल शास्त्रियों और तकनीकी जानकारों से चर्चा हो रही है। उन्होंने बताया कि ओडिशा स्थित कोणार्क का सूर्य मंदिर उदाहरण है जहां मंदिर के अंदर सूर्य की किरणें पहुंचती हैं। ऐसे में गर्भगृह तक सूर्य की किरणें कैसे पहुंचे, इसको लेकर सभी तकनीकी पहलुओं और अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी पर विचार किया जा रहा है।
दिसंबर 2023 तक पूरा हो जाएगा गर्भ गृह का निर्माण
न्यास के सदस्य ने बताया कि मंदिर निर्माण से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर एक समिति बनाई गई है। इसमें भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) दिल्ली, आईआईटी मुम्बई, आईआईटी रुड़की सहित राष्ट्रीय भवन निर्माण संस्थान के विशेषज्ञों और अन्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ शामिल हैं और इनसे भी परामर्श हो रहा है। वहीं, ट्रस्ट के एक अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी ने बताया कि श्रीराम मंदिर का निर्माण कार्य तेज गति से जारी है। ऐसा प्रयास किया जा रहा है कि दिसंबर 2023 तक गर्भ गृह का निर्माण पूरा हो जाए और लोग दर्शन कर सकें। इसके आगे विस्तार और भव्यता का और काम चलता रहेगा।








