दिल्ली-एनसीआर से डिग्री और नौकरी संग युवा ला रहे एड्स..बीमारी का ये है सबसे बड़ा कारण, इस जांच में खुलासा

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च्च शिक्षा और रोजगार के लिए दिल्ली-एनसीआर (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) में गजियाबाद, नोएडा व गुरुग्राम जा रहे जिले के युवा डिग्री और नौकरी के साथ एचआईवी संक्रमण लेकर लौट रहे हैं। यह खुलासा स्वशासी मेडिकल कॉलेज, फिरोजाबाद के एआरटी यानी एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर में जांच व काउंसलिंग के दौरान हुआ है।

बीते पांच वर्ष में जिले में 1162 एचआईवी संक्रमित पाए गए, जिनमें 85 की मौत हो चुकी है। एआरटी सेंटर की काउंसलिंग में यह बात सामने आई कि एनसीआर में रहने के दौरान युवाओं ने असुरक्षित यौन संबंध बनाए, जिसके कारण वे एचआईवी की चपेट में आ गए।

 

आंकड़ों के अनुसार, एचआईवी के 60 प्रतिशत मामले 18 से 32 वर्ष की उम्र के बीच दर्ज किए गए हैं। वर्तमान में जिले में 477 महिलाएं और 600 एचआईवी सक्रमित पुरुषों का इलाज चल रहा है। आरटी सेंटर के परामर्शदाता ब्रजेश कुमार ने एक चुनौती को उजागर किया।

उन्होंने बताया कि सरकार संक्रमित व्यक्ति आपस में शादी कर सकते हैं। पिछले दिनों तीन संक्रमित युवतियों की शादी संक्रमित पुरुषों से कराई गई थी। वर्तमान में 25 एड्स पीड़ित पुरुषों ने शादी के लिए पंजीकरण कर रखा है लेकिन उनके लिए लड़कियां नहीं मिल रही हैं।

80 फीसदी दिल्ली-एनसीआर में हुए संक्रमित
जनवरी 2021 में मेडिकल कॉलेज में एआरटी सेंटर (एंटी-रेट्रोवायरल थेरेपी सेंटर) की स्थापना हुई थी। राहत की बात यह है कि 80 प्रतिशत मामलों में वायरल लोड 1000 से नीचे है, जो दर्शाता है कि नियमित उपचार प्रभावी साबित हो रहा है।

इंट्रोगेट काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर की काउंसलर रेनू तिवारी ने बताया कि संक्रमित पाए जाने वाले मरीज की पूरी केस हिस्ट्री जैसे की वह कहां रहता है, किसके साथ उसके संबंध हैं, पिछले दिनों कहां घूमने गया था, पिछले दो साल में कहां-कहां रहा है आदि की जानकारी जुटाई जाती है।
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इस जानकारी में ही यह खुलासा हुआ है कि जिले के अधिकांश युवा, जो कि एड्स संक्रमण की चपेट में आए, उनमें से 80 फीसदी ने दिल्ली-एनसीआर में जाकर या तो पढ़ाई की या फिर नौकरी। इनमें न सिर्फ युवक बल्कि बड़ी संख्या में युवतियां भी शामिल हैं। इस बारे में युवाओं को जागरूक होने की जरूरत है।

एड्स की वैक्सीन नहीं, नियमित उपचार ही बचाव
गंभीर बात यह है कि संक्रमित मरीजों में 200 के करीब मरीज ऐसे हैं, जो बीच में ही इलाज कराना छोड़ चुके हैं। स्वास्थ्य विभाग इनकी तलाश में लगा है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि अभी तक एड्स की वैक्सीन नहीं बनी है। सिर्फ दवाओं के सहारे मरीजों का उपचार किया जा रहा है। संक्रमित मरीज को नियमित रूप से उपचार लेना चाहिए।

संक्रमित को अछूता न करें, इस प्रकार संपर्क से नहीं फैलता एड्स
एड्स पीड़ित से सामान्य गले मिलने, हाथ मिलाने या सामाजिक चुंबन से एचआईवी नहीं फैलता है। पीड़ित के खांसने या छींकने से भी वायरस नहीं फैलता। भोजन या पानी साझा करने से भी नहीं फैलता। शौचालय, पूल, या सार्वजनिक स्थान जैसे जिम उपकरण साझा करने से नहीं फैलता। पीड़ित के कपड़े या बिस्तर साझा करने से भी एड्स नहीं फैलता।

इस प्रकार फैलता है एड्स
एचआईवी मुख्य रूप से असुरक्षित यौन संबंध, संक्रमित रक्त-से-रक्त संपर्क जैसे सुई साझा करने, और गर्भावस्था या स्तनपान के दौरान मां से बच्चे में फैलता है।

एड्स के प्रति लोगों को जागरूक भी किया जा रहा है और पीड़ितों का उपचार भी किया जा रहा है। मेडिकल साइंस से जुड़े लोग एड्स की वैक्सीन बनाने पर निरंतर रिसर्च भी कर रहे हैं। जब तक वैक्सीन जारी नहीं हो जाती, तब तक पीड़ित के लिए नियमित उपचार ही बचाव का जरिया है।– डा. योगेश गोयल, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज

आंकड़ों पर एक नजर
– 1162 के करीब मरीज 5 वर्ष में संक्रमित मिले
– 85 के करीब मरीजों की 5 वर्ष में मौत हुई
– 1077 के करीब मरीज नियमित रूप से उपचार ले रहे
– 477 संक्रमित महिलाएं हैं जिले में नियमित उपचार लेने वालों में
– 600 संक्रमित पुरुष हैं जिले में नियमित उपचार लेने वालों में

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