बेहद शर्मनाक..पैसा न चुकाने पर 5 घंटे गिरवी रखा शव, 25000 देने पर सौंपा, इलाज कराने में बिकी 50 डिसमिल जमीन

 

 

झांसी मेडिकल अस्पताल के गेट नंबर चार के पास स्थित एक प्राइवेट अस्पताल में एक बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है। हादसे में घायल युवक के परिजनों से अस्पताल ने उपचार के नाम पर 1.07 लाख रुपये जमा करा लिए।

युवक की मौत के बाद परिजनों से 77 हजार रुपये अलग से जमा करने की मांग करने लगे। परिजनों के पैसा न होने की बात कहने पर शव देने से इनकार कर दिया। कई घंटे मान-मनौव्वल का दौर चला।

 

पांच घंटे बाद गांव से पहुंचे लोगों ने 25 हजार रुपये देने के साथ काफी मिन्नतें की तब जाकर अस्पताल प्रशासन ने शव उनके हवाले किया। परिजन जब शव लेकर पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे, तब यह बात सामने आई।

परिजन पोस्टमार्टम कराने के बाद शव लेकर गांव लौट गए। उधर, पुलिस का कहना है कि परिजनों की ओर से कोई शिकायत नहीं मिली है। ललितपुर के नाराहट गांव निवासी दिनेश कुशवाहा (27) प्राइवेट काम करता था।

उसके परिजनों ने बताया कि 19 नवंबर को दिनेश बाइक से बहन से मिलने उसके परौल स्थित गांव जा रहा था। बरौदिया गांव पहुंचने पर मिट्टी के ब्रेकर में उसकी बाइक असंतुलित होकर गिर गई। उसके सिर में गहरी चोट आई।

हालत नाजुक होने पर डॉक्टरों ने दिनेश को झांसी मेडिकल अस्पताल रेफर कर दिया। प्राइवेट एंबुलेंस से दिनेश को झांसी लाया गया। यहां एंबुलेंस चालक ने मेडिकल अस्पताल के बजाय प्राइवेट में इलाज कराने की सलाह दी।

एंबुलेंस चालक ही मेडिकल अस्पताल के गेट नंबर चार के सामने स्थित प्राइवेट अस्पताल लेकर पहुंचा। दिनेश को भर्ती कर लिया गया। शुरुआत में 37 हजार रुपये जमा कराए गए। 6 दिन में 60 हजार रुपये की दवा मंगाई। मंगलवार शाम उसकी मौत हो गई।
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अस्पताल ने कुल 1.14 लाख का बिल बना दिया और शेष 77 हजार रुपये मांगने लगा। परिजन रोने-बिलखने लगे। जीजा राम सिंह का कहना है कि हम लोगों के पास पैसा नहीं था। अस्पताल ने पैसा न मिलने पर शव देने से मना कर दिया।

यह बात उन लोगों ने गांव वालों को बताई। गांव से कुछ लोग पहुंचे। उन लोगों ने 25 हजार रुपये दिए। काफी मनौव्वल के बाद अस्पताल से शव लेकर जाने दिया गया। नवाबाद थाना प्रभारी जेपी पाल का कहना है कि परिजनों की ओर से अभी तक कोई लिखित शिकायत नहीं मिली है।

इलाज कराने में बिक गई 50 डिसमिल जमीन
दिनेश की मौत के बाद घर में मातम छाया है। पत्नी मनीषा का रो-रोकर बुरा हाल है। परिवार में दो छोटे-छोटे बच्चे हैं। बड़ा बेटा दो साल का जबकि छोटा महज 6 माह का है। पति की मौत की खबर सुनकर पत्नी मनीषा बेहोश हो गई।

जीजा रामसेवक का कहना है कि दिनेश परिवार का इकलौता कमाने वाला था। घर में नकदी भी नहीं थी। इस वजह से दिनेश के उपचार के लिए परिवार को अपनी 50 डिसमिल जमीन भी बेचनी पड़ी। उसे भी नहीं बचा सके। परिवार के हाथ से इकलौता कमाने वाले के साथ ही उनकी जमीन भी चली गई।
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