जसपुर की विश्वनाथ पेपर मिल अब कूड़े से बिजली बनाकर आत्मनिर्भर बनेगी। यूपीसीएल का अड़ंगा खत्म करते हुए उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग ने साफ कर दिया है कि ग्रीन एनर्जी लगाने वालों पर पुराने नियम नहीं थोपे जा सकते हैं।
यूपीसीएल को दो महीने का अग्रिम नोटिस
यूपीसीएल ने सप्लाई कोड रेगुलेशन के क्लॉज 4.1.1(12) का हवाला देकर लोड घटाने से साफ इन्कार कर दिया। यूपीसीएल का तर्क था कि लोड तभी घट सकता है, जब आवेदन की तारीख से पहले के चार महीनों का वास्तविक उपभोग कम रहा हो। इससे परेशान कंपनी ने आयोग का दरवाजा खटखटाया। आयोग के अध्यक्ष एमएल प्रसाद, सदस्य विधि अनुराग शर्मा और सदस्य तकनीकी प्रभात किशोर डिमरी की पीठ ने मामले की सुनवाई की। उन्होंने यूपीसीएल के रुख को अनुचित ठहराया।
पीठ ने स्पष्ट किया कि चार माह की निगरानी का नियम उन उपभोक्ताओं के लिए है, जो बिल बचाने के लिए हेरफेर करते हैं। जिन्होंने स्थायी रूप से अपना खुद का पावर प्लांट लगा लिया है, उन्हें सामान्य श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। आयोग ने अपनी विशेष शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए माना कि ऐसे मामलों में यूपीसीएल को दो महीने का अग्रिम नोटिस मिलना पर्याप्त है।
यूपीसीएल को निर्देश दिया गया कि कंपनी का अनुबंध लोड 4700 किलोवाट से घटाकर 1250 किलोवाट किया जाए और यह संशोधन आठ नवंबर 2025 से प्रभावी माना जाए। पिछली अवधि में लिए गए फिक्स चार्ज का समायोजन करना होगा। यूपीसीएल को पेपर मिल की ओर से जमा की गई करीब 2.48 करोड़ की सिक्योरिटी डिपॉजिट का नए लोड के अनुसार पुनर्मूल्यांकन कर अतिरिक्त धनराशि 15 दिनों के भीतर लौटानी होगी।








