उत्तराखंड: 26 साल बाद भी टिहरी बांध विस्थापितों की पुनर्वास की पीड़ा बरकरार

टिहरी बांध परियोजना के कारण करीब 26 साल पहले विस्थापित हुए हजारों लोगों की मुश्किलें आज भी खत्म नहीं हुई। बेहतर भविष्य और सुरक्षित जीवन की उम्मीद में अपने घर-गांव छोड़कर पुनर्वास स्थलों पर पहुंचे परिवार अब भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष कर रहे हैं। टिहरी बांध परियोजना की वजह से पुराना टिहरी शहर और लगभग सौ से अधिक गांव पूरी तरह विस्थापित हुए। विस्थापन के दशकों बाद भी कई पुनर्वास स्थलों पर सड़क, पेयजल, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसी सुविधाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है।

पुरानी टिहरी से बौराड़ी में विस्थापित कई प्रभावितों का कहना है कि बांध परियोजना के लिए उन्होंने अपनी जमीन, मकान और पुश्तैनी गांव खो दिए, लेकिन इसके बदले जिस व्यवस्थित पुनर्वास की उम्मीद थी, वह पूरी तरह साकार नहीं हो पाई। समय के साथ उनकी समस्याएं दूर होने के बजाए और बढ़ती गई, नई पीढ़ी रोजगार और शिक्षा के लिए दूसरे क्षेत्रों की ओर पलायन करने को मजबूर है।

वहीं, बुजुर्गों के लिए पुनर्वास स्थलों पर मूलभूत सुविधाओं का अभाव आज भी चिंता का विषय बना हुआ है। स्थानीय लोग बताते हैं कि बिजली कनेक्शन में छूट, पेयजल और सीवर शुल्क माफ किया जाना था,लेकिन वह नहीं किया गया। हनुमंत राव कमेटी की सिफारिशों को भी पूरी तरह से लागू नहीं किया गया। विस्थापितों के लिए स्वच्छ पेयजल नहीं है। री घुत्तु के बजाए टिहरी झील से पानी लिफ्ट कर पहुंचाया जा रहा है। जो स्वच्छ नहीं है। सड़क, परिवहन, स्वच्छ पेयजल, स्वास्थ्य आदि की बुनियादी सुविधाएं न होने से क्षेत्र को पर्यटक स्थल के रूप में भी विकसित नहीं किया जा सका है।

लोगों का कहना

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विस्थापन के दौरान आश्वासन मिला था कि प्रभावितों को पुनर्वास स्थल पर टिहरी शहर से चार गुना अच्छी सुविधाएं मिलेंगी, लेकिन बुनियादी सुविधा तक नहीं मिली। यही वजह है कि व्यापारी पलायन को मजबूर हैं। -देवेंद्र नौडियाल, स्थानीय निवासी

टिहरी बांध परियोजना से प्रभावित परिवारों के पूर्व लंबित जल मूल्य एवं सीवर शुल्क देयकों को माफ किया जाना था, इसका शासनादेश भी हुआ, इसके बावजूद अधिकतर प्रभावितों से पानी और सीवर शुल्क की वसूली की गई। -कमल सिंह महर, बौराड़ी निवासी

पुरानी टिहरी में चौतरफा सुविधाएं थी, व्यापारियों का अच्छा व्यापार चलता था, लेकिन यहां पुनर्वास स्थल पर पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। बौराड़ी बस अड्डे से पहले नैनीताल, चंडीगढ़, दिल्ली आदि शहरों के लिए परिवहन निगम की बस सेवाएं थी, जो कोविड के बाद से बंद हैं। -एमएल सिमल्टी, स्थानीय निवासी

क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी है। अस्पताल उचित सुविधाओं, चिकित्सकों और उपकरणों की कमी के कारण केवल रेफरल सेंटर बनकर रह गए हैं। यही वजह है कि क्षेत्र के लोग मेडिकल कॉलेज की मांग के लिए आंदोलनरत हैं। -त्रिलोक सिंह रमोला, स्थानीय निवासी

बौराड़ी और आस-पास के क्षेत्रों में कई प्रभावित गांव हैं, क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्त सुविधा है। क्लोग जिस रि घुत्तु की बात कर रहे हैं, वह क्षेत्र से 100 किलोमीटर दूर है। टिहरी झील से उन्हें पानी उपलब्ध करवाया जा रहा है। लोगों को जो समस्याएं हैं, उससे उन्हें अवगत कराएं तो उसे दिखवाया जाएगा। -निकिता खंडेलवाल, जिलाधिकारी टिहरी

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