पूर्वी प्रशांत में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई- ड्रग तस्करी के शक में दो नावें उड़ाईं, 5 लोगों की मौत

मेरिकी सेना ने जानकारी दी कि पूर्वी प्रशांत महासागर में ड्रग तस्करी के संदेह में दो नावों को निशाना बनाकर उड़ा दिया गया। इस कार्रवाई में कुल पांच लोगों की मौत हो गई, जबकि एक व्यक्ति जीवित बचा है। यह कार्रवाई ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका, लैटिन अमेरिका में कथित नार्को-टेररिस्ट नेटवर्क के खिलाफ अभियान तेज कर रहा है।

 

अमेरिकी दक्षिणी कमान के अनुसार, ये हमले शनिवार को उन समुद्री मार्गों पर किए गए जिन्हें ड्रग तस्करी के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि, सेना ने यह स्पष्ट नहीं किया कि जिन नावों को निशाना बनाया गया, उनमें वास्तव में मादक पदार्थ मौजूद थे या नहीं।

 

कैसे किया गया हमला?

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी वीडियो में देखा गया कि समुद्र में चल रही छोटी नावें अचानक तेज विस्फोट के साथ नष्ट हो गईं। अमेरिकी कोस्ट गार्ड को जीवित बचे व्यक्ति की तलाश और बचाव अभियान के लिए अलर्ट किया गया है, और उसकी स्थिति पर नजर रखी जा रही है।

ऐसे हमलों में अब तक हो चुकी है 168 लोगों की मौत

बताया गया है कि सितंबर की शुरुआत से अब तक ऐसे हमलों में कम से कम 168 लोगों की मौत हो चुकी है। यह अभियान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान के बाद तेज हुआ था, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका लैटिन अमेरिकी कार्टेल्स के साथ ‘सशस्त्र संघर्ष’ की स्थिति में है।

ट्रंप प्रशासन का क्या दावा?

ट्रंप प्रशासन का दावा है कि ये हमले अमेरिका में ड्रग्स की आपूर्ति और ओवरडोज़ से होने वाली मौतों को रोकने के लिए जरूरी हैं। हालांकि, इस दावे को लेकर आलोचना भी हो रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका में पहुंचने वाला अधिकांश फेंटानिल मैक्सिको के रास्ते जमीन के जरिए तस्करी होकर आता है, जो चीन और भारत से आए केमिकल्स से तैयार किया जाता है। इन सैन्य कार्रवाइयों की वैधता और प्रभावशीलता पर भी सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि कई मामलों में ठोस सबूत सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।

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पश्चिम एशिया में बढ़ा तनाव

इस बीच, पश्चिम एशिया में भी तनाव बढ़ता दिख रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच हालिया संघर्ष के बाद युद्धविराम वार्ता पाकिस्तान में बिना किसी समझौते के समाप्त हो गई। इसके बाद डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को घोषणा की कि अमेरिकी नौसेना, होर्मुज जलडमरूमध्य से आने-जाने वाले जहाजों पर नाकेबंदी शुरू करेगी। यह कदम ईरान पर दबाव बढ़ाने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% इसी मार्ग से गुजरता है।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, इस नाकेबंदी में ईरानी बंदरगाहों को भी शामिल किया जाएगा, जिससे क्षेत्रीय और वैश्विक स्तर पर तनाव और बढ़ने की आशंका है।

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