तीस हजारी कोर्ट ने ठग सुकेश चंद्रशेखर को एक न्यायिक अधिकारी पर दबाव बनाने और सुप्रीम कोर्ट के जज बनकर फोन करने के मामले में दोषी ठहराया है। कोर्ट ने माना कि सुकेश ने खुद को पहले सुप्रीम कोर्ट के तत्कालीन जज के निजी सचिव और बाद में जज के रूप में पेश किया और न्यायिक अधिकारी से उसे जल्द जमानत देने का दबाव बनाया। जमानत नहीं देने पर अधिकारी को पेशेवर नुकसान की धमकी भी दी गई।
जांच को लेकर दिल्ली पुलिस पर कड़ी टिप्पणी
हालांकि, कोर्ट ने मामले की पुलिस जांच पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने कहा कि जांच उम्मीद के मुताबिक नहीं हुई और पुलिस ने कई महत्वपूर्ण सबूत जुटाने में लापरवाही बरती। कोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने समय पर कई अहम गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए। न्यायिक अधिकारी के स्टाफ, सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री के संबंधित अधिकारियों और अन्य अहम लोगों से भी समय पर पूछताछ नहीं की गई। इसके अलावा न्यायिक अधिकारी के मोबाइल और सरकारी लैंडलाइन का कॉल डिटेल रिकॉर्ड भी हासिल नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि संबंधित कार्यालय की सीसीटीवी फुटेज भी सुरक्षित नहीं की गई और फोन व सिम कार्ड बरामद करने की कोशिश नहीं की गई। जिस पुलिसकर्मी की निगरानी में सुकेश था, उसके फोन के गायब होने की परिस्थितियों की भी पर्याप्त जांच नहीं की गई।








