मकराना के मार्बल से निर्मित चौखट का पहला पत्थर रखा गया।
श्रीरामजन्मभूमि में विराजमान रामलला के निर्माणाधीन दिव्य मंदिर में माघ शुक्ल पूर्णिमा के पर्व पर पुष्य नक्षत्र में सर्वार्थसिद्धि योग की घड़ी में गर्भगृह की दहलीज (ड्योढ़ी) का विधिपूर्वक पूजन किया गया। इसके उपरांत मकराना के मार्बल से निर्मित चौखट का पहला पत्थर रख दिया गया। मालूम हो कि दिव्य मंदिर में मकर संक्रांति के उपरांत शुभ मुहूर्त में रामलला के विग्रह की प्राण प्रतिष्ठा की जानी है। इसके लिए सभी पहलुओं पर एक साथ काम चल रहा है। फिलहाल राम मंदिर के गर्भगृह की दीवारें पहले ही खड़ी की जा चुकी है।
इसके साथ अष्टकोणीय गर्भगृह में लगने वाले मकराना मार्बल के स्तम्भ भी खड़े किए जा चुके है। गर्भगृह में आठ स्तम्भ लगने थे। हालांकि नौ अलग-अलग खंडो में खड़े होने स्तम्भों को निर्धारित ऊंचाई तक नहीं पहुंचाया गया। इसके पीछे तर्क दिया गया कग मंदिर के भूतल में लगने वाले सभी 168 स्तम्भों को एक साथ खड़ा किया जाएगा। इन स्तम्भों की निर्धारित ऊंचाई 19 फिट छह इंच है। उधर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के महासचिव चंपत राय ने बताया कि गर्भगृह के चौखट का पत्थर तैयार होने के बाद पूजन किया गया। उसके पत्थरों को यथास्थान रखने की प्रक्रिया प्रारम्भ हो गयी है। उन्होंने बताया कि गर्भगृह में अंदरूनी दीवार, छत व फर्श से लेकर चौखट तक सभी मकराना के मार्बल से ही निर्मित होंगे। उन्होंने बताया कि फर्श व छत में खूबसूरत मीनाकारी भी की जाएगी।
चौखट पूजन से बरसती है मां लक्ष्मी की कृपाउधर इस पूजन के शास्त्रत्त्ज्ञों के दल में शामिल कारसेवकपुरम स्थित वेद विद्यालय के प्रधानाचार्य आचार्य इंद्रदेव मिश्र ने बताया कि मंदिर अथवा घरों में चौखट का बहुत महत्व है। शास्त्रत्त् के अनुसार चौखट का नित्य पूजन करना चाहिए। वास्तु शास्त्रत्त् के हिसाब से नकारात्मक ऊर्जा से मुक्त रखने के लिए मुख्य द्वार को वास्तु दोष से मुक्त होना जरूरी है। इससे मां लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है। दहलीज पर बनाए गए शुभ मांगलिक चिह्न घर की सुख और समृद्धि में वृद्धि करते है।
इस पूजन में ट्रस्ट महासचिव के अलावा न्यासी डा. अनिल मिश्र, महंत दिनेन्द्र दास, अयोध्या नरेश विमलेन्द्र मोहन मिश्र, मंदिर निर्माण प्रभारी गोपाल राव, संघ के चीफ परियोजना प्रबंधक जगदीश आफले, इं. सहस्त्रत्त् भोजनी, एसपी सुरक्षा पंकज कुमार, एलएण्डटी के चीफ प्रोजेक्ट डायरेक्टर वीके मेहता, टीईसी के चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर बिनोदकुमार शुक्ल, के अलावा आचार्य दुर्गा प्रसाद गौतम, आचार्य नारद भट्टराई व अन्य शामिल रहे।








