आज भी साजिशें जारी हैं: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि जो लोग अपने धर्म के प्रति सच्चे हैं, वे कभी भी कट्टरपंथी सोच का समर्थन नहीं कर सकते। लेकिन उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टीकरण की राजनीति करने वालों ने हमेशा ऐसी सोच के सामने घुटने टेके हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि जब भारत आजाद हुआ और सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ मंदिर के पुनर्निर्माण का संकल्प लिया, तब भी उन्हें रोकने की कोशिशें की गईं। उन्होंने बताया कि 1951 में तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद के सोमनाथ आने पर भी आपत्ति जताई गई थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भी देश में ऐसी ताकतें मौजूद हैं, जो उस समय सोमनाथ के पुनर्निर्माण का विरोध कर रही थीं। उन्होंने चेतावनी दी कि आज तलवारों की जगह नए और गुप्त तरीकों से भारत के खिलाफ साजिशें की जा रही हैं। पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे समय में देश को अधिक सतर्क रहने, खुद को मजबूत बनाने और एकजुट रहने की जरूरत है।
आक्रांता इतिहास में सिमटे, सोमनाथ आज भी गर्व से खड़ा है: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि समय का चक्र सब कुछ बदल देता है। उन्होंने कहा कि जो मजहबी आक्रांता सोमनाथ को नष्ट करने के इरादे से आए थे, वे आज केवल इतिहास के कुछ पन्नों तक सीमित रह गए हैं। पीएम मोदी ने कहा कि वहीं सोमनाथ मंदिर आज भी उसी विशाल समुद्र के किनारे अपनी ऊंची धर्मध्वजा के साथ मजबूती से खड़ा है, जो भारत की आस्था और संस्कृति की शक्ति का प्रतीक है।
सोमनाथ के इतिहास को भुलाने की कोशिश हुई: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा ‘अगर किसी देश के पास 100 साल पुरानी विरासत होती है तो वह देश उसे अपनी पहचान बनाकर दुनिया के सामने प्रस्तुत करता है, वहीं भारत के पास सोमनाथ जैसे हजारों साल पुराने पुण्यस्थान है, लेकिन दुर्भाग्य से आजादी के बाद गुलामी की मानसिकता वाले लोगों ने उनसे पल्ला झाड़ने की कोशिश की, उस इतिहास को भूलाने के प्रयास हुए। हम जानते हैं कि सोमनाथ की रक्षा के लिए देश ने कैसे-कैसे बलिदान दिए थे, कितने ही नायकों का इतिहास सोमनाथ मंदिर से जुड़ा है लेकिन दुर्भाग्य से इसे कभी उतना महत्व नहीं दिया गया बल्कि आक्रमण के इतिहास को भी कुछ राजनेताओं और इतिहासकारों द्वारा व्हाइटवॉश करने की कोशिश की गई।’
सोमनाथ को नष्ट करने के हुए कई प्रयास-पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा ‘जब महमूद गजनी से लेकर औरंगजेब तक तमाम आक्रांता सोमनाथ पर हमला कर रहे थे तो उन्हें लग रहा था कि उनकी तलवार सनातन सोमनाथ को जीत रही है, वे मजहबी कट्टरपंथी यह नहीं समझ पाए कि जिस सोमनाथ को वे नष्ट करना चाहते हैं उसके नाम में ही ‘सोम’ अर्थात ‘अमृत’ जड़ा हुआ है। उसके ऊपर सदाशिव महादेव के रूप में वह चैतन्य शक्ति प्रतिष्ठित है जो कल्याणकारी भी है और शक्ति का स्रोत भी है।’







