मात्र 26 साल की उम्र में विधायक और 45 साल में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष। नितिन नबीन के लिए यह सपनों जैसी तरक्की रही है। राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनकी पदोन्नति भाजपा में पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है, क्योंकि पार्टी राष्ट्रीय राजनीति पर अपनी पकड़ और मजबूत करना चाहती है।
कम सुर्खियों में रहने वाले नबीन बिहार से पांच बार के विधायक और राज्य के लोकनिर्माण विभाग के मंत्री हैं। उन्हें 14 दिसंबर को पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था। इस घोषणा से आखिरकार इस अटकल पर विराम लग गया था कि अनुभवी जेपी नड्डा की जगह पार्टी में कौन लेगा। उनके नाम की घोषणा राजनीतिक गलियारों के लिए भी आश्चर्य की बात थी, जो इस महत्वपूर्ण नियुक्ति को लेकर भाजपा और उसके वैचारिक मूल संगठन आरएसएस के बीच टकराव की चर्चा कर रहे थे।
शांत स्वभाव वाले नवीन को इस साल अप्रैल में तमिलनाडु, केरल और असम सहित कई राज्यों में विधानसभा चुनाव के दौरान पार्टी की कमान संभालनी है और उन्होंने आते ही काम शुरू भी कर दिया है। कार्यकारी अध्यक्ष बनने के बाद से वह कई राज्यों का दौरा कर चुके हैं। उनका संदेश सीधा और तीखा रहा है। राजनीति 100 मीटर की दौड़ नहीं, बल्कि एक मैराथन है। यह गति की नहीं, बल्कि धैर्य और सहनशक्ति की परीक्षा है। पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यही उनका मूल मंत्र रहा है। नबीन ने बिहार में कार्यकर्ताओं से कहा, हमारा मकसद सिर्फ पश्चिम बंगाल और दूसरे राज्यों में विधानसभा चुनावों में जीतने के बारे में सोचने से आगे बढ़ना है। हमें पंचायत से लेकर संसद तक भगवा फहराना है। आप सभी को पार्ट-टाइम नेता राहुल गांधी की तरह नहीं, बल्कि फुल-टाइम नेता बनने की कोशिश करनी चाहिए, जो चुनाव के समय बिहार आते हैं और छुट्टियों के लिए जर्मनी चले जाते हैं। उन्होंने असम में कहा, हम सिर्फ चुनाव जीतने के लिए लोगों के बीच नहीं जाते, हम लोगों की समस्याओं को हल करने के लिए जाते हैं।
आने वाले चुनाव में खुद को साबित करने का मौका
नबीन भारतीय जनता युवा मोर्चा के जरिये आगे बढ़े हैं और आने वाले चुनाव उनके लिए खुद को साबित करने का बड़ा मौका होंगे ताकि संगठन के राष्ट्रीय प्रमुख के तौर पर अपनी काबिलियत साबित कर सकें। वह 2006 में मुख्यधारा की राजनीति में आए, जब बीजेपी ने उनके पिता नवीन किशोर सिन्हा की मौत के बाद उन्हें पटना पश्चिम विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने के लिए चुना। नवीन किशोर सिन्हा पार्टी के एक अनुभवी नेता थे और संघ के करीबी थे। नवीन को राजनीति में कभी बाहरी माना जाता था और इस दुनिया में आने के लिए उन्हें अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी। आज 20 साल बाद उन्हें एक जमीनी नेता और संगठन का आदमी माना जाता है। 45 साल के नवीन ने बांकीपुर से लगातार पांच चुनावी जीत हासिल की हैं।
नबीन के 37 सेट में दाखिल हुए नामांकन पत्र, सभी वैध
भाजपा के संगठन पर्व के लिए राष्ट्रीय चुनाव अधिकारी बनाए गए लक्ष्मण ने कहा, 36 राज्यों-केंद्रशासित प्रदेशों में से 30 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्षों के चुनाव के बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव की प्रक्रिया शुरू की गई। यह संख्या न्यूनतम 50 प्रतिशत राज्यों की आवश्यक संख्या से कहीं अधिक है। नाम वापस लेने की अवधि खत्म होने के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए केवल नितिन नबीन का नाम प्रस्तावित किया गया। लक्ष्मण ने कहा, 19 जनवरी को नामांकन प्रक्रिया दोपहर 2 बजे से शाम 4 बजे के बीच पूरी हुई। कुल मिलाकर, राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नितिन नवीन के पक्ष में नामांकन पत्र के 37 सेट प्राप्त हुए। जांच करने पर, सभी सेट नामांकन पत्र आवश्यक प्रारूप में सही ढंग से भरे हुए पाए गए और वैध थे।









