आज से दिल्ली विधानसभा का बजट सत्र शुरू हो रहा है। बजट सत्र के पहले दिन एक अहम राजनीतिक प्रस्ताव सामने आने वाला है। यह प्रस्ताव लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ लाए गए प्रस्ताव के विरोध में लाया जा रहा है। भाजपा विधायक शिखा राय निंदा प्रस्ताव पेश करेंगी।
यह प्रस्ताव ओम बिरला के खिलाफ लोकसभा में विपक्षी दलों द्वारा लाए गए निष्कासन प्रस्ताव के विरोध में है। इस प्रस्ताव के जरिए संसदीय परंपराओं, अध्यक्ष पद की गरिमा और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता के समर्थन का संदेश दिया जाएगा। इसमें कहा गया है कि अध्यक्ष का पद राजनीति से ऊपर होता है और उसे विवाद का विषय बनाना सही नहीं है।
इस मुद्दे पर दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता पहले ही अपनी चिंता जता चुके हैं। उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष को पत्र लिखकर कहा था कि राजनीतिक कारणों से ऐसे प्रस्ताव लाना दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में इस प्रस्ताव का ध्वनि मत से खारिज होना इस बात का संकेत है कि सदन को अपने अध्यक्ष पर पूरा भरोसा है।
सोमवार सुबह 11 बजे वंदे मातरम के साथ बजट सत्र शुरू होगा। सबसे पहले सदन में दिवंगत व्यक्तियों को श्रद्धांजलि दी जाएगी। नियम-280 के तहत जनहित से जुड़े मुद्दे विशेष उल्लेख के जरिए उठाए जाएंगे। विधायक शिखा रॉय लोकसभा में विपक्ष द्वारा स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव के खिलाफ निंदा प्रस्ताव पेश करेंगी।
सदन में बिजनेस एडवाइजरी कमेटी की चौथी रिपोर्ट, पब्लिक अकाउंट्स कमेटी की पहली, दूसरी और तीसरी रिपोर्ट तथा प्रिविलेज कमेटी की दूसरी रिपोर्ट पेश होगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, जो वित्त मंत्री भी हैं, साल 2025-26 का दिल्ली का इकोनॉमिक सर्वे (हिंदी और अंग्रेजी में) सदन में पेश करेंगी।
वित्तीय समितियों-पब्लिक अकाउंट्स, एस्टिमेट्स और गवर्नमेंट अंडरटेकिंग्स के लिए 9-9 सदस्यों के चुनाव का प्रस्ताव भी रखा जाएगा। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की कई ऑडिट रिपोर्ट रखी जाएंगी, जिनमें राज्य वित्त, राजस्व, सामाजिक क्षेत्र, दिल्ली जल बोर्ड और विश्वविद्यालयों से जुड़ी रिपोर्ट शामिल हैं। विभिन्न विभागों की वार्षिक रिपोर्ट, ऑडिट रिपोर्ट और नियमों में संशोधन से जुड़े नोटिफिकेशन भी सदन में प्रस्तुत किए जाएंगे।
बजट से पहले सरकार के बड़े संकेत
दिल्ली का बजट आने से पहले सरकार ने अपनी प्राथमिकताओं के साफ संकेत दे दिए हैं। इस बार महिलाओं के स्वास्थ्य, प्रदूषण नियंत्रण और आधुनिक परिवहन पर खास जोर रहने वाला है, जिससे आम लोगों को सीधे असर देखने को मिल सकता है। सोमवार को सुबह 11 बजे से बजट सत्र शुरू हो रहा है। मंगलवार को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता दिल्ली सरकार का बजट पेश करेंगी।
दिल्ली में बजट से पहले सरकार की तैयारियों और संकेतों ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। इस बार का बजट महिलाओं के स्वास्थ्य, बेहतर इलाज, प्रदूषण नियंत्रण और ई-परिवहन जैसे अहम मुद्दों पर केंद्रित रहने की संभावना है। सरकार महिलाओं के स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने जा रही है। सूत्रों के मुताबिक, बजट का एक बड़ा हिस्सा महिलाओं से जुड़ी योजनाओं और सुविधाओं पर खर्च किया जा सकता है। इसमें अस्पतालों की सुविधाओं को मजबूत करना, नई सेवाएं शुरू करना और स्वास्थ्य ढांचे में सुधार शामिल है।
रिवहन के क्षेत्र में भी बड़ा निवेश जारी रह सकता है। पिछले साल सरकार ने अपने बजट का करीब 20 फीसदी हिस्सा परिवहन पर खर्च किया था। इस बार भी ई-परिवहन और अंतरराज्यीय इलेक्ट्रिक कनेक्टिविटी पर सबसे ज्यादा जोर रहने की संभावना है। शिक्षा, स्वास्थ्य और जल आपूर्ति इस बार भी बजट के सबसे बड़े हिस्से रह सकते हैं। हर घर नल योजना पर काम जारी है, लेकिन इसकी रफ्तार अभी धीमी है, जिसे तेज करने पर भी जोर रहेगा।
स्वास्थ्य क्षेत्र में होगा बड़ा बदलाव
स्वास्थ्य क्षेत्र में इस बार बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। सरकार अस्पतालों के इंटीग्रेशन की दिशा में काम कर रही है, जिससे इलाज और मेडिकल शिक्षा दोनों को फायदा होगा। इसके साथ ही नई स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार की योजना भी है। पिछले बजट में आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर जोर दिया गया था और इस बार इसे और आगे बढ़ाने की तैयारी है।
प्रदूषण का मुद्दा बजट में होगा अहम
प्रदूषण के मुद्दे पर भी सरकार गंभीर नजर आ रही है। दिल्ली के खराब इनवायरमेंट को सुधारने के लिए कई योजनाएं पाइपलाइन में हैं। लैंडफिल साइट्स भले ही एमसीडी के दायरे में आती हैं, लेकिन सरकार इसके लिए अलग से बजट देने की तैयारी कर रही है, ताकि कूड़े के पहाड़ और उससे होने वाले प्रदूषण पर नियंत्रण पाया जा सके।
समाज कल्याण की योजनाएं अभी अधूरी
हालांकि, समाज कल्याण से जुड़ी कुछ अहम योजनाएं अभी अधूरी हैं। कमजोर तबके की महिलाओं को 2,500 रुपये सम्मान राशि और विधवा व बेसहारा महिलाओं की पेंशन 2,500 से बढ़ाकर 3,000 रुपये करने का वादा अभी तक पूरा नहीं हो पाया है। ऐसे में इस बजट में इन योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
गांवों में ठोस काम की उम्मीद
ग्रामीण विकास और कृषि क्षेत्र को लेकर भी सरकार सक्रिय दिख रही है। मुख्यमंत्री ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर उनकी राय ली है। पिछले बजट में इस क्षेत्र के लिए करीब 2 फीसदी राशि तय की गई थी, लेकिन जमीनी स्तर पर बदलाव सीमित रहे हैं। इस बार गांवों में ठोस काम की उम्मीद है।
पिछले से बड़ा हो सकता है ये बजट
पिछले साल 2025-26 के लिए एक लाख करोड़ रुपये का बजट पेश किया गया था, जो उससे पहले के 76 हजार करोड़ रुपये से 31.5 फीसदी ज्यादा था। इस बार का बजट इससे भी बड़ा हो सकता है। कुल मिलाकर, बजट से पहले सरकार ने ऐसे संकेत दिए हैं जो आम जनता की उम्मीदों को बढ़ा रहे हैं, अब नजर इस बात पर रहेगी कि घोषणाएं जमीन पर कितनी उतरती हैं।
पिछले बजट में घोषित योजनाओं का बड़ा हिस्सा लागू ही नहीं हुआ : कांग्रेस
प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष देवेन्द्र यादव ने बजट सत्र से पहले मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की कार्यशैली पर सवाल उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछले बजट में घोषित योजनाओं का बड़ा हिस्सा जमीन पर लागू ही नहीं हो सका। उन्होंने वित्तीय वर्ष 2025-26 में एक लाख करोड़ रुपये के बजट का दावा किया था, जिसमें योजनाओं, परियोजनाओं और कार्यक्रमों के लिए 57,850 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए थे, लेकिन इसका लगभग 43 प्रतिशत खर्च ही नहीं किया गया।
उन्होंने बताया कि अप्रैल 2025 से फरवरी 2026 तक योजनाओं पर केवल 33,234 करोड़ रुपये ही खर्च हुए, जो कुल संशोधित बजट का करीब 57.45 प्रतिशत है। यादव ने कहा कि यह आंकड़े दर्शाते हैं कि सरकार अपनी ही घोषणाओं को लागू करने में विफल रही है।
यादव ने कहा कि प्रदूषण से जूझ रही दिल्ली में पर्यावरण विभाग को दिए गए 437 करोड़ रुपये में से मात्र 15 प्रतिशत खर्च हुआ, जबकि प्रदूषण नियंत्रण के लिए निर्धारित 296 करोड़ रुपये में से 50 करोड़ से भी कम राशि उपयोग में लाई गई। इलेक्ट्रिक व्हीकल नीति और एंटी-स्मॉग योजनाओं पर भी अपेक्षित खर्च नहीं हुआ। उन्होंने दिल्ली जल बोर्ड की स्थिति को गंभीर बताते हुए कहा कि उस पर 75,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है, जबकि योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधनों का उपयोग नहीं हो रहा।
यादव ने महिला समृद्धि योजना, शिक्षा, स्टार्टअप नीति और कौशल विकास योजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि इनमें बजट प्रावधान होने के बावजूद खर्च नहीं हुआ। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की अधिकांश घोषणाएं कागजों तक सीमित रहीं।
आप ने विधानसभा के बजट सत्र के लिए बनाई रणनीति
आम आदमी पार्टी ने विधानसभा के सोमवार से शुरू हो रहे बजट सत्र के लिए अपनी रणनीति स्पष्ट की। नेता प्रतिपक्ष आतिशी ने चेतावनी दी कि यदि पार्टी के निलंबित चार विधायकों को बहाल नहीं किया गया तो आप विधायक सदन की कार्यवाही का पूरी तरह बहिष्कार करेंगे और जनता के मुद्दे सड़कों पर उठाएंगे। उन्होंने भाजपा सरकार पर विपक्ष की आवाज दबाने का भी आरोप लगाया।
पार्टी कार्यालय में रविवार को संवाददाता सम्मेलन में आतिशी ने कहा कि पार्टी के चार विधायकों संजीव झा, कुलदीप कुमार, जरनैल सिंह और सोमदत्त को अपने साथी विधायक अजय दत्त को सदन में प्रवेश से रोके जाने का विरोध करने पर निलंबित किया था। पहले तीन दिन और फिर पूरे सत्र के लिए निलंबन का फैसला लिया गया था, जो अब तक वापस नहीं हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि इन विधायकों को विधानसभा परिसर में प्रवेश तक की अनुमति नहीं दी जा रही है।
उन्होंने कहा कि संविधान ने विधायिका को सरकार से अलग और स्वतंत्र रखा है ताकि विपक्ष जनता की आवाज उठा सके, लेकिन भाजपा सरकार इस मूल भावना को कमजोर कर रही है। अगर सदन में हमें बोलने नहीं दिया जाएगा तो हम सड़क पर जनता की आवाज उठाएंगे।आतिशी ने कहा कि यदि 22 आप विधायकों को रोका गया तो उनके समर्थन में लाखों लोग सड़कों पर उतरेंगे।
इस दौरान आप विधायक अजय दत्त ने कहा कि विपक्ष का काम जनता के मुद्दों को सदन में उठाना है, लेकिन सरकार उसे रोक रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में बिजली, पानी, सड़कों, शिक्षा और स्वास्थ्य की स्थिति खराब है, लेकिन इन मुद्दों पर चर्चा से बचने के लिए विपक्ष को दबाया जा रहा है।







