मणिपुर के कामजोंग जिले में पिछले 24 घंटे के दौरान अलग-अलग घटनाओं में कम से कम 28 घरों में आग लगा दी गई। संदिग्ध उग्रवादियों ने नागा और कुकी समुदाय की बस्तियों को निशाना बनाया। इसके बाद आम लोगों को अपने घर छोड़कर भागना पड़ा। उन्होंने जंगलों और सेना के पास के एक शिविर में शरण ली। पुलिस ने यह जानकारी दी।
एक अन्य घटना में रविवार सुबह दो लोग घायल हो गए। अज्ञात हथियारबंद उपद्रवियों ने राष्ट्रीय राजमार्ग-202 पर ग्वालटाबी और महादेवा के बीच जा रही एक कार पर गोलीबारी की। यह घटना उखरुल जिले में लितान थाने के अधिकार क्षेत्र में हुई।
इस बीच, अधिकारियों ने बताया कि शनिवार रात कामजोंग जिले के चासाद गांव में कुकी समुदाय के 15 घरों में आग लगा दी गई। इसके बाद बड़ी संख्या में लोगों को अपने घर छोड़ने पड़े। उन्होंने जंगलों और पास के सेना शिविर में शरण ली। अधिकारियों ने बताया कि संदिग्ध उग्रवादियों ने गांव पर हमला किया और घरों में आग लगा दी।
हमले में कितने लोगों की मौत हुई?
यह घटना गांव पर हुए एक हमले में कुकी समुदाय के एक आम नागरिक की मौत और चार अन्य लोगों के गोली लगने से घायल होने के कुछ घंटे बाद हुई। पुलिस ने कहा कि प्रभावित इलाके में स्थिति को नियंत्रण में लाने के लिए असम राइफल्स, सीमा सुरक्षा बल और कामजोंग पुलिस की संयुक्त टुकड़ी तैनात की गई है।
उपमुख्यमंत्री ने क्या कहा?
उपमुख्यमंत्री नेमचा किपगेन ने चासाद में हुई हिंसा की निंदा की। उन्होंने कुकी समुदाय के नागरिक की मौत पर दुख जताया। साथ ही, घायल गांव के नेताओं और विस्थापित परिवारों को लेकर चिंता जताई। उन्होंने घरों को जलाने की घटना को असहनीय अपराध बताया।
अब तक कितने लोगों की मौत हो चुकी है?
फरवरी से तमेंगलॉन्ग, कामजोंग, उखरुल, कांगपोकपी और नोनी जिलों में कुकी और नागा समुदायों के बीच जातीय हिंसा जारी है। इन झड़पों में 50 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं, दर्जनों घरों को आग के हवाले कर दिया गया है।






