बांग्लादेश में तीन प्रमुख दलों के घोषणापत्र…भारत को लेकर क्या दावे, हिंदुओं की स्थिति पर कौनसे वादे?

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बांग्लादेश के चुनाव में अब चार दिन से भी कम का समय बचा है। सभी राजनीतिक दलों ने इन चुनावों की तैयारी में कमर कस ली है। खासकर अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना की गैरमौजूदगी और उनकी पार्टी- आवामी लीग को चुनाव से बाहर किए जाने के बाद हर दल की निगाह उसके वोटरों को अपनी तरफ लाने पर होगी। ऐसे में राजनीतिक दलों ने बांग्लादेश में पारंपरिक रूप से आवामी लीग के वोटर रहे लोगों को लुभाने की कोशिश शुरू कर दी है, फिर चाहे वह बांग्लादेश के अल्पसंख्यक हों या बांग्लादेश और भारत के रिश्तों की पैरवी करने वाले लोगों का समूह। अधिकतर दलों ने अपनी विचारधारा को किनारे करते हुए वोट जुटाने के लिए वादों का पिटारा खोला है।

 

ऐसे में यह जानना अहम है कि बांग्लादेश की तीन प्रमुख पार्टियों- बांग्लादेश नेशनल पार्टी (बीएनपी), जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) और नए-नए अस्तित्व में आए राजनीतिक दल- नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी) के घोषणापत्रों में अपने देश के लिए क्या अहम वादे हैं? भारत को लेकर इनमें क्या कहा गया है? देश के अल्पसंख्यकों, खासकर हिंदुओं को लेकर इन घोषणापत्रों में क्या जिक्र है? आइये जानते हैं…

 

 

बांग्लादेश को लेकर तीनों प्रमुख पार्टियों की क्या ‘अहम’ घोषणाएं?

बांग्लादेश में 12 फरवरी 2026 को होने वाले चुनावों के लिए तीन प्रमुख राजनीतिक दलों ने कुछ अहम घोषणाएं की हैं। खासकर देश की अंदरूनी स्थिति को सुधारने के लिए तीनों दलों ने अपने घोषणापत्रों में शासन, अर्थव्यवस्था, न्याय और बुनियादी ढांचे को लेकर कई बड़े वादे किए हैं…

1. बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी)

दिवंगत खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बीएनपी ने घोषणापत्र में ‘शोबार आगे बांग्लादेश’ (सबसे पहले बांग्लादेश) का नारा दिया है। इसके तहत पार्टी ने सामाजिक सुरक्षा और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित किया है।

बांग्लादेश के लिए बीएनपी के अहम वादे

महिला सशक्तिकरण: महिलाओं के नाम पर ‘फैमिली कार्ड’ जारी करने और उन्हें स्नातकोत्तर (पोस्ट ग्रैजुएशन) स्तर तक मुफ्त शिक्षा देने का वादा।
बुलेट ट्रेन: ढाका को प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड रेल नेटवर्क देने का वादा, जिससे यात्रा का समय एक घंटे के भीतर सिमट जाए।
रेलवे आधुनिकीकरण: ढाका-चटगांव, ढाका-नारायणगंज और ढाका-मयमनसिंह गलियारों का विद्युतीकरण-डबल ट्रैक का भी वादा।
दूसरे देशों से जुड़ाव: बांग्लादेश को म्यांमार और ढाका-कुनमिंग (चीन) रेल लिंक के माध्यम से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूत करने का प्रस्ताव।
रियायतें: छात्रों, विकलांगों और 60 वर्ष से अधिक आयु के नागरिकों के लिए रेल सेवाओं में विशेष रियायतें देने का एलान किया गया है।

तारिक रहमान ने स्पष्ट किया है कि बांग्लादेश किसी भी देश का प्रॉक्सी नहीं बनेगा और उन्होंने नारा दिया है, “न दिल्ली, न पिंडी, बांग्लादेश सबसे पहले।”

हिंदुओं, अल्पसंख्यकों और धार्मिक सुरक्षा पर

बीएनपी ने हिंदुओं और बांग्लादेश के अन्य अल्पसंख्यकों के जीवन, संपत्ति और पूजा स्थलों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाकर सुरक्षा देने का वादा किया है। पार्टी ने घोषणापत्र में कहा है कि ‘धर्म व्यक्तिगत है, राज्य सबके लिए है।’ बीएनपी ने कहा है कि वह बिना किसी बाधा के धार्मिक अनुष्ठानों और त्योहारों को मनाने का अधिकार सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा सभी धर्मों के धार्मिक नेताओं के लिए सरकारी वजीफा और कल्याणकारी कार्यक्रम शुरू किए जाने की भी बात कही गई है।

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2. जमात-ए-इस्लामी (जेईआई)

बांग्लादेश के 2026 के चुनावों के लिए जमात-ए-इस्लामी ने ‘एक सुरक्षित और मानवीय बांग्लादेश’ के नारे के साथ अपना 88 पन्नों का चुनावी घोषणापत्र जारी किया है। पार्टी इस बार 300 में से 179 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रही है।

बांग्लादेश के लिए जमात के अहम वादे

दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था: 2040 तक बांग्लादेश को दो ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और प्रति व्यक्ति आय $10,000 तक पहुंचाने का लक्ष्य।
आर्थिक महाशक्ति बनाना: बांग्लादेश को वैश्विक अर्थव्यवस्था में 35वें स्थान से उठाकर 20वें स्थान पर लाने का लक्ष्य।
इस्लामी कानून: इस्लामी शरिया के तहत अलग मुस्लिम पर्सनल लॉ लागू करने और इसके लिए हाईकोर्ट में  विशेष बेंच स्थापित करने का वादा।
महिला सशक्तीकरण: कैबिनेट में महिलाओं को शामिल करने का संकल्प। मातृत्व के दौरान हर दिन काम के घंटों को पांच घंटे करने का प्रस्ताव।
सैन्य प्रशिक्षण: 18-22 वर्ष के युवाओं के लिए 6 से 12 महीने का स्वैच्छिक सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू करने की योजना।
बुलेट ट्रेन: ढाका को सिलहट जैसे प्रमुख शहरों से जोड़ने के लिए हाई-स्पीड ट्रेन (बुलेट ट्रेन) नेटवर्क और रेलवे के आधुनिकीकरण का वादा किया।

भारत को लेकर जमात के घोषणापत्र में जो बातें कही गई हैं, वह पुराने भारत-विरोधी विमर्श से एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है। हालांकि, पार्टी पारंपरिक तौर पर पाकिस्तान की करीबी रही है और 1971 की जंग में भी पाकिस्तान से बांग्लादेश के अलगाव के खिलाफ थी। जमात के कई नेताओं पर इस जंग में पाकिस्तान की मदद के भी आरोप लगे हैं। लेकिन इस बार इस पार्टी ने पाकिस्तान का जिक्र नहीं किया है। इसकी जगह पार्टी ने मुस्लिम बहुल देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देने की बात कही है।

हिंदुओं, अल्पसंख्यकों और धार्मिक सुरक्षा पर

जमात-ए-इस्लामी घोषणापत्र में धार्मिक अल्पसंख्यकों (खासकर हिंदुओं) की सुरक्षा के लिए किसी ठोस सुरक्षा ढांचे या कानूनी तंत्र का जिक्र नहीं है, इसे लेकर भारतीय सुरक्षा हलकों में चिंता जताई गई है। इसमें केवल अल्पसंख्यकों के प्रतिनिधित्व की बात कही गई है, लेकिन किसी योजना या नीति का जिक्र नहीं है।

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3. नेशनल सिटीजन पार्टी (एनसीपी)

जातीय नागरिक पार्टी, जिसे अंग्रेजी में नेशनल सिटीजन पार्टी के तौर पर भी बुलाया जा रहा है, बांग्लादेश की राजनीति में एक नया और उभरता हुआ दल है। इसका गठन फरवरी 2025 में हुआ था। यह मुख्य रूप से छात्रों के नेतृत्व वाली पार्टी है, जिसे 2024 के शेख हसीना विरोधी प्रदर्शनों (जुलाई विद्रोह) के प्रमुख चेहरों ने बनाया है। इस पार्टी ने चुनावों के लिए जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले इस्लामी गठबंधन के साथ रहने का एलान किया है। पार्टी ने ‘युवा और सम्मान का घोषणापत्र’ जारी किया है, इसमें 36 मुख्य बिंदु शामिल हैं।

बांग्लादेश के लिए एनसीपी के अहम वादे

जवाबदेही (हिसाब दओ): हिसाब दो के नारे के तहत मंत्रियों, सांसदों और अफसरों की आय और संपत्ति का विवरण डिजिटल पोर्टल पर डालने का वादा।
रोजगार और मजदूरी: पांच वर्षों में एक करोड़ नौकरियां पैदा करने और न्यूनतम मजदूरी 100 टका प्रति घंटा तय करने का लक्ष्य।
युवा भागीदारी: मतदान की आयु घटाकर 16 वर्ष और नीति निर्धारण में युवाओं को लाने के लिए ‘यूथ सिविक काउंसिल’ बनाने का वादा।
न्याय और सुधार: 2024 के जुलाई नरसंहारऔर अन्य मानवाधिकार उल्लंघनों की जांच के लिए स्वतंत्र आयोग बनाने का संकल्प।
महिला अधिकार: महिलाओं के लिए संसद में 100 सीटें आरक्षित करने का वादा। 6 महीने के वैतनिक मातृत्व अवकाश का वादा किया गया है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एनसीपी के पास युवाओं का बड़ा समर्थन आधार है, लेकिन उसे स्थापित अनुभवी पार्टियों के मुकाबले अपनी अनुभवहीनता और पुराने दलों के साथ गठबंधन जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

हिंदुओं, अल्पसंख्यकों और धार्मिक सुरक्षा पर

एनसीपी ने मानवाधिकार आयोग के तहत हिंदुओं और अन्य अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के लिए एक विशेष स्वतंत्र जांच सेल बनाने का वादा किया है। इस सेल के पास स्वतंत्र जांच की शक्ति होगी, जिससे धार्मिक घृणा, सांप्रदायिकता, अल्पसंख्यकों के उत्पीड़न और पहचान के आधार पर होने वाले सभी प्रकार के भेदभाव, हिंसा और दमन को प्रभावी ढंग से रोका जा सके।

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इसके अलावा एनसीपी ने घोषणापत्र के बिंदु 28 के तहत, स्वदेशी समुदायों और अन्य हाशिए पर रहने वाले समूहों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य देखभाल, रोजगार, मतदान के अधिकार और सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने का वादा किया है।


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