ये सरकारी प्रतिभूतियां क्या हैं?
जब सरकार को देश चलाने, सड़कें बनाने या जनकल्याण के काम के लिए पैसे की जरूरत होती है, तो वह जनता से उधार लेती है। इसके बदले में सरकार एक कागज देती है, जिसे सरकारी प्रतिभूतियां (G-Sec) कहते हैं।
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- अगर आपने केंद्र सरकार को पैसा दिया है, तो इसकी सुरक्षा की गारंटी खुद भारत सरकार की है। इसे ‘संप्रभु सुरक्षा’ कहते हैं। इसका मतलब यह है कि जब तक देश है, आपका पैसा सुरक्षित है।
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- जैसे केंद्र सरकार उधार लेती है, वैसे ही उत्तर प्रदेश, राजस्थान या महाराष्ट्र जैसी राज्य सरकारें भी जरूरतों के लिए कर्ज लेती हैं। इसे राज्य विकास ऋण (एसडीएल) कहते हैं। यहां भी सुरक्षा वैसी ही है, लेकिन अक्सर केंद्र के मुकाबले आधा या पौने फीसदी ब्याज ज्यादा मिल जाता है।
- आप सोचेंगे कि हर महीने छोटे-छोटे निवेश में ये सरकारी कागज कैसे खरीदें? यहीं काम आते हैं गिल्ट फंड। ये एक तरह के म्यूचुअल फंड हैं, जो आपका पैसा केवल सरकारी कागजों में ही लगाते हैं।
FD में कहां है असली पेच?
कई लोग सोचते हैं कि एफडी सबसे अच्छी है, लेकिन इसके तीन बड़े दुश्मन हैं जिनसे आपको बचना चाहिए:
- आपने आज 3 साल के लिए पैसा जमा किया। 3 साल बाद जब वह वापस मिलेगा और उस समय ब्याज दरें गिर चुकी होंगी, तो आपको पैसा कम ब्याज पर जमा करना पड़ेगा। आपकी आय अचानक गिर जाएगी।
- सावधि जमा से मिलने वाला ब्याज आपकी कुल आय में जुड़ता है। अगर आप ऊंचे टैक्स दायरे में आते हैं, तो 7.5% का ब्याज असल में आपके हाथ में सिर्फ 5.25% ही बचता है। यह तो महंगाई से लड़ने लायक भी नहीं रहता।
- एफडी में आपको उतना ही रिटर्न मिलेगा जितना कागज पर लिखा है। पर सरकारी बॉन्ड्स में एक जादुई फायदा होता है जिसे पूंजीगत लाभ कहते हैं।
सवाल है कि आप कैसे निवेश करें?
छोटे निवेशक अब RBI Retail Direct पोर्टल या अपने स्टॉक ब्रोकर (जैसे Zerodha, Groww) के जरिये सीधे सरकारी बॉन्ड्स खरीद सकते हैं।
आम आदमी के लिए सबसे आसान रास्ता है गिल्ट फंड: अगर आपको सीधे खरीदने में उलझन लगती है, तो गिल्ट फंड आपके लिए बेहतरीन हैं।
- यहां एक विशेषज्ञ मैनेजर बैठा है जो देखता है कि कब कौन-सा सरकारी कागज खरीदना है और कब बेचना है ताकि आपको ज्यादा फायदा मिले।
- एफडी को तोड़ने पर जुर्माना लगता है, लेकिन यहां आप जब चाहें अपना पैसा निकाल सकते हैं।
- आप मात्र पांच सौ रुपये से भी शुरुआत कर सकते हैं।