झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने धनबाद समेत पूरे राज्य में आगामी त्योहारों के दौरान वायु और ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के निर्देशों के तहत प्रदूषण निवारण अधिनियम 1981 की धारा 31(ए) के अंतर्गत यह व्यवस्था लागू की गई है। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि केवल उन शहरी क्षेत्रों में ही आतिशबाजी की बिक्री की अनुमति होगी जहां वायु गुणवत्ता सूचकांक 1 से 100 के बीच यानी अच्छा या संतोषप्रद श्रेणी में आता है। इसके अलावा, बाजार में केवल उन्हीं पटाखों को बेचने की इजाजत दी जाएगी जिनकी ध्वनि का स्तर 125 डेसिबल से कम होगा।
पर्यावरण मानकों का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा। बोर्ड के सदस्य सचिव राजीव लोचन बक्शी ने बताया कि निर्धारित नियमों की अनदेखी करने वालों पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, वायु (प्रदूषण निवारण और नियंत्रण) अधिनियम 1981 की धारा 37 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम 1986 के प्रावधानों के तहत कानूनी कार्रवाई होगी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अनुसार वायु गुणवत्ता सूचकांक का स्तर 100 माइक्रोग्राम प्रति घन मीटर से अधिक नहीं रहना चाहिए। सूचकांक का स्तर 201 से 300 के मध्य पहुंचना हवा की खराब श्रेणी दर्शाता है, जो दमा के रोगियों और बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक होता है।
धनबाद में बीते वर्ष दिवाली की रात जमकर पटाखे फोड़े गए थे, जिससे हवा में प्रदूषण का स्तर तय मानकों से काफी ऊपर चला गया था। उस समय पीएम-10 का एयर क्वालिटी इंडेक्स 215 के पार दर्ज किया गया था। जिला प्रशासन द्वारा केवल 54 व्यापारियों को लाइसेंस देने के बावजूद जिले भर में हजारों अनधिकृत दुकानें खुल गई थीं और लगभग 20 करोड़ रुपये के पटाखों की बिक्री हुई थी।
बीते वर्ष बैंक मोड़ क्षेत्र में आतिशबाजी से सर्वाधिक शोर हुआ था। वहां शाम 6 बजे से रात 12 बजे तक औसत ध्वनि का स्तर 91.21 डेसिबल दर्ज हुआ था, जबकि रात 8 बजे से 10 बजे के बीच यह स्तर 101.4 डेसिबल तक पहुंचा और दिवाली की रात यह 98.2 से 103.4 डेसिबल तक दर्ज किया गया। हीरापुर क्षेत्र में प्री-दिवाली के दौरान अधिकतम औसत ध्वनि स्तर 71.6 डेसिबल था, जो दिवाली की रात बढ़कर 101.4 डेसिबल तक जा पहुंचा।







