चार बार की फीफा विश्व कप चैंपियन इटली की टीम को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। टीम लगातार तीसरी बार फीफा विश्व कप के लिए क्वालिफाई करने में नाकाम रही। 2026 वर्ल्ड कप के यूरोपीय प्लेऑफ में इटली को बोस्निया और हर्जेगोवीना की टीम के हाथों पेनल्टी शूटआउट में 4-1 से हार का सामना करना पड़ा।
मैच की शुरुआत इटली के लिए शानदार रही। 15वें मिनट में मोइजे कीन ने बॉक्स के बाहर से शानदार फिनिश के साथ टीम को बढ़त दिलाई। ऐसा लगा कि इटली आसानी से मैच जीत लेगा। लेकिन पहला हाफ खत्म होने से ठीक पहले खेल ने करवट ली। डिफेंडर एलेसांद्रो बाास्तोनी को प्रोफेशनल फाउल के चलते रेड कार्ड दिखाया गया। उन्होंने अमार मेमिक को गोल करने से रोकने के लिए गिराया, जिसके कारण इटली 10 खिलाड़ियों के साथ खेलने को मजबूर हो गया। यहीं से मैच का रुख पूरी तरह बदल गया।
संख्यात्मक बढ़त का फायदा उठाते हुए बोस्निया ने लगातार दबाव बनाया। आखिरकार हैरिस तबाकोविच ने कॉर्नर के बाद बॉक्स में मिले मौके को गोल में बदलकर स्कोर 1-1 कर दिया। इसके बाद मैच एक्स्ट्रा टाइम तक गया, लेकिन कोई भी टीम निर्णायक बढ़त नहीं ले सकी। पेनल्टी शूटआउट में बोस्निया ने कमाल का प्रदर्शन किया और चारों शॉट्स सफलतापूर्वक गोल में बदले। वहीं इटली ने अपनी पहली और तीसरी पेनल्टी मिस कर दी। आखिरकार एस्मीर बजराकतरेविक ने निर्णायक पेनल्टी मारकर अपनी टीम को ऐतिहासिक जीत दिलाई।
यह हार इटली के फुटबॉल इतिहास के सबसे खराब दौर में से एक मानी जा रही है। 2006 में आखिरी बार वर्ल्ड कप जीतने वाली यह टीम अब लगातार तीन बार टूर्नामेंट में जगह नहीं बना सकी है। टीम ने आखिरी बार 2014 में फीफा विश्वकप खेला था और पहले ही राउंड से बाहर हो गई थी। इसके बाद से टीम 2018 और 2022 फीफा विश्वकप में नहीं खेल पाई थी। खास बात यह है कि मौजूदा कोच गेनारो गटूसो उस 2006 की विजेता टीम का हिस्सा थे, लेकिन कोच के रूप में वह टीम को इस संकट से नहीं निकाल पाए। इटली अब पहली ऐसी पूर्व वर्ल्ड कप विजेता टीम बन गई है, जो लगातार तीन वर्ल्ड कप में क्वालिफाई नहीं कर सकी।
फीफा विश्वकप की सबसे सफल टीम में शामिल इटली
इटली की टीम फुटबॉल इतिहास की सबसे सफल टीमों में से एक रही है। इस टीम ने दशकों तक दुनिया पर राज किया और कई बड़े खिताब अपने नाम किए। टीम ने चार बार फीफा विश्वकप का खिताब जीता है। इसके अलावा टीम ने 1968 और 2021 में यूरो कप का खिताब भी जीता था। इटली की टीम 1936 ओलंपिक में गोल्ड मेडल भी जीत चुकी है। इटली अपने चार खिताबों के साथ फीफा विश्वकप इतिहास की दूसरी सबसे सफल टीमों में शामिल है। यह रिकॉर्ड जर्मनी के बराबर है। इन दोनों से आगे केवल ब्राजील है, जिसने पांच बार वर्ल्ड कप जीता है।
सबसे ज्यादा फीफा वर्ल्ड कप जीतने वाली टीमें
| टीम | खिताब | जीत के साल |
|---|---|---|
| ब्राजील | 5 | 1958, 1962, 1970, 1994, 2002 |
| जर्मनी | 4 | 1954, 1974, 1990, 2014 |
| इटली | 4 | 1934, 1938, 1982, 2006 |
| अर्जेंटीना | 3 | 1978, 1986, 2022 |
| फ्रांस | 2 | 1998, 2018 |
| उरुग्वे | 2 | 1930, 1950 |
| इंग्लैंड | 1 | 1966 |
| स्पेन | 1 | 2010 |
दूसरी ओर, बोस्निया के लिए यह जीत ऐतिहासिक रही। टीम ने 2014 के बाद पहली बार वर्ल्ड कप में जगह बनाई है और कुल मिलाकर यह उनका दूसरा वर्ल्ड कप होगा। घरेलू मैदान जेनिका में दर्शकों के जबरदस्त समर्थन के बीच टीम ने यह बड़ी सफलता हासिल की। अब बोस्निया ग्रुप बी में कनाडा, स्विट्जरलैंड और कतर जैसी टीमों से भिड़ेगी।
दूसरे प्लेऑफ मुकाबले में चेकिया टीम ने डेनमार्क को पेनल्टी शूटआउट में हराकर वर्ल्ड कप 2026 के लिए क्वालिफाई कर लिया। प्राग में खेले गए इस मुकाबले में दोनों टीमें 2-2 से बराबरी पर रहीं। इसके बाद पेनल्टी शूटआउट में चेकिया ने बाजी मार ली।
मैच की शुरुआत में ही पावेल सल्क ने शानदार वॉली से चेकिया को बढ़त दिलाई। हालांकि 72वें मिनट में जोआकिम एंडरसन ने हेडर से स्कोर बराबर कर दिया। एक्स्ट्रा टाइम में लदिस्लाव क्रेजकि के गोल से चेकिया फिर आगे हो गया, लेकिन डेनमार्क ने हार नहीं मानी। सब्स्टीट्यूट कैस्पर होग ने 111वें मिनट में गोल कर मुकाबला फिर बराबर कर दिया। पेनल्टी में चेकिया ने बेहतर प्रदर्शन किया, जहां माइकल सैडिलेक का निर्णायक शॉट टीम को जीत दिलाने में सफल रहा।






