आजकल झारखंड में देखने को मिल रही है, जहां स्कूली छात्र-छात्राएं नदी पार करके स्कूल में पढ़ने जा रहे हैं। झारखंड के खूंटी जिले की 15 वर्षीय छात्रा सुनीता होरो (बदला हुआ नाम) अगले साल बोर्ड परीक्षा देने वाली है। लेकिन स्कूल पहुंचने की राह अब उसके लिए आसान नहीं रही। गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने वाला एकमात्र पुल 19 जून को भारी बारिश के चलते टूट गया। अब सुनीता को स्कूल पहुंचने के लिए बनई नदी का एक हिस्सा तैरकर पार करना पड़ता है।
एक जोड़ी कपड़े साथ लेकर जाती हूं: छात्रा
सुनीता बताती है, “शुरुआत में गांववालों ने एक बांस की सीढ़ी लगाकर पुल के टूटे हिस्से को जोड़ा था। लेकिन प्रशासन ने इसे खतरनाक बताकर हटवा दिया। अब हफ्ते में एक-दो बार ही स्कूल जा पाती हूं। तैरते वक्त स्कूल बैग को सिर के ऊपर रखती हूं और एक जोड़ी अतिरिक्त कपड़े साथ लेकर जाती हूं क्योंकि कपड़े पूरी तरह भीग जाते हैं।”
सरकारी हाई स्कूल, पेलोल की यह छात्रा अकेली नहीं है। अंघरबारी गांव के कई छात्र-छात्राएं, जो बोर्ड परीक्षा की तैयारी में लगे हैं, अब इसी जोखिम भरे रास्ते से स्कूल जाते हैं। सुनीता की एक सहपाठी रीता प्रधान (बदला हुआ नाम) कहती हैं, “हममें से ज्यादातर बच्चे गीले कपड़ों में घर लौटते हैं, जिससे अगले दिन स्कूल जाना मुश्किल हो जाता है।”









