Iran Protests- ‘ईरान के बहादुर लोगों का समर्थन’, बोले मार्को रुबियो,तेहरान में 217 मौतों का दावा

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रान में खामेनेई शासन के खिलाफ जनता का हल्ला बोल जारी है। जनता सुप्रीम नेता के खिलाफ जमकर नारेबाजी करते हुए विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। वहीं अब तक विरोध प्रदर्शनों में 62 लोगों की जान भी जा चुकी है। जबकि 2300 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

 

ईरान में आंदोलन का नया चेहरा

ईरान में जारी आंदोलन का एक नया चेहरा भी सामने आया है, जहां युवतियां खामेनेई की जलती हुई तस्वीरों से सिगरेट जलाती नजर आ रही हैं। महिलाओं के ऐसा करने के पीछे क्या वजह है?

 

अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान

ईरान में जारी विरोध प्रदर्शन पर अमेरिकी विदेश मंत्री का बयान आया है। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक्स पोस्ट में कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका ईरान के बहादुर लोगों का समर्थन करता है। मार्को रुबियो का यह बयान अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ईरान सरकार को खुली चेतावनी के बाद आया है।

 

ईरान के इतिहास का सबसे बड़ा आंदोलन

मानवाधिकार समूहों के अनुसार विरोध प्रदर्शन देश के सभी 31 प्रांतों के 100 से अधिक शहरों और कस्बों में फैल चुके हैं, जिससे यह हाल के इतिहास में देश के सबसे व्यापक विरोध आंदोलनों में से एक बन गया है। प्रदर्शकारियों ने अयातुल्ला अली खामेनेई के सत्ता के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। विरोध प्रदर्शन शनिवार (10 जनवरी) को 13वें दिन में प्रवेश कर चुका है।

09:25 AM, 10-Jan-2026

ईरान में विरोध प्रदर्शनों की वजह?

ईरान के अंदर खराब अर्थव्यवस्था, आसमान छूती खाद्य कीमत और गिरती मुद्रा के विरोध प्रदर्शन शुरू हुए। जिसने अब सीधा सत्ता परिवर्तन की मांग का रूप ले लिया है। 28 दिसंबर को रियाल के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद तेहरान के मुख्य बाजारों में शुरू हुए ये प्रदर्शन अब सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं। सुरक्षा बलों की कड़ी कार्रवाई और व्यापक इंटरनेट प्रतिबंध के बावजूद हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतर चुके हैं। तेहरान, मशहद और अन्य प्रमुख शहरों में ‘तानाशाह का नाश हो’ के नारे और रजा पहलवी के नेतृत्व में राजशाही की वापसी के समर्थन में नारे गूंज रहे हैं।

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7 जनवरी से विरोध प्रदर्शनों में आई तेजी

नीति अनुसंधान संगठन इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर के अनुसार, 7 जनवरी से ईरान में विरोध प्रदर्शनों की संख्या और तीव्रता में वृद्धि हुई है, जिसमें तेहरान जैसे प्रमुख शहर और उत्तर-पश्चिमी ईरान भी शामिल हैं। थिंक टैंक ने आगे कहा कि शासन ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, जिसमें कम से कम एक प्रांत में विरोध प्रदर्शनों को दबाने के लिए इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (आईआरजीसी) की जमीनी सेना का उपयोग करने जैसा कदम भी शामिल है।


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