जांच कमेटी नहीं तय कर सकी किसकी मिलीभगत से गुप्त रोगी करता रहा ब्लड डोनेट

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जांच कमेटी नहीं तय कर सकी किसकी मिलीभगत से गुप्त रोगी करता रहा ब्लड डोनेट

अयोध्या-

योगी सरकार कुछ भी कर ले लेकिन स्वास्थ्य विभाग पर अंकुश लगाना कठिन है क्योंकि
जिला चिकित्सालय के ब्लड बैंक से खून का सौदाकर जरूरतमंदों को खून बेचने के आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए बैठायी गई जांच बेनतीजा निकली।
जांच अधिकारी यह नही तय कर सके कि किस कर्मचारी की मिलीभगत से गुप्तरोग का रोगी छह बार ब्लड बैंक को ब्लड डोनेट करता रहा। प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने ओरोपी की सही पहचान न होने के बाद ब्लड बैंक के नौ कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करते हुए ब्लड बैंक से हटा कर उनकी ड्यूटी क्षेत्रीय निदान केन्द्र में लगा दी। बड़ा सवाल यह है कि जिन कर्मचारियों की डयूटी में गुप्तरोग के रोगी ने ब्लड डोनेट किया उन पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने रहम करते हुए कोई कार्रवाई नहीं की।
जिला चिकित्सालय में काफी समय से कुछ पेशेवर लोग खून का सौदाकर जरूरतमंद लोगों को चार से पांच हजार रुपए में बेच रहे थे। यह कार्य ब्लड बैंक के कर्मचारियों की मिली भगत से हो रहा था। यह मामला प्रकाश में तब आया जब नगर के कैंट थाने के
लालकुर्ती निवासी जितेन्द्र निषाद को तीन माह में छह बार रक्तदान करते पाया गया। ब्लड बैंक के कर्मचारियों का कहना है कि जितेन्द्र गुप्तरोग का रोगी है। वह ब्लड डोनेट करता था। जिसे के बदले में ब्लड बैंक से ब्लड लेकर वह किसी जरूरतमंद को बेच देता था इस कार्य में ब्लड बैंक के कर्मचारियों का सहयोग
रहता था। छह बार जांच में ब्लड सेम्पल मानक के अनुरूप न मिलने पर उसका ब्लड फेंक दिया जाता बीच था। इस मामले के प्रकाश में आने के बाद प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक ने टीम गठित कर जांच करायी। बेला जांच टीम की ओर से दी गई रिपोर्ट में यह तथ्य सामने वभाग नहीं आया कि कोन ब्लड डोनर
की मदद कर रहा था। आखिर एसआईसी ने ब्लड बैंक के नौ कर्मचारियों का पटल परिवर्तन कर दिया। किन्तु जिन लोगों की ड्यूटी में गुप्त रोग के रोगी ने ब्लड डोनेट किया न तो उनका पटल परिवर्तित किए गए और न ही उनसे स्पष्टीकरण मांगा। एसआईसी के निर्देश को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि तीन कर्मचारियों का पटल परिवर्तन क्यों नहीं ? दूसरा सवाल जो अब तक लावा अनुतरित है। कि आखिर ब्लड बैंक में ब्लड का को सौदागर कौन लोग हैं ? प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डा. सीबीएन त्रिपाठी ने कहा कि जांच कमेटी ने जो निर्णय लिया है उसी के आधार पर कार्यवाही की गई है।

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