नई दिल्ली में भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन (बीआईआरसी) 2026 की शुरुआत शुक्रवार को हो रही है। तीन दिन तक चलने वाले इस सम्मेलन में चावल के कारोबार, निर्यात के नए बाजार और वर्ष 2027 में कीमतों के संभावित रुख पर चर्चा होगी। भारतीय चावल निर्यातक महासंघ की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में अब तक 32,467 पंजीकरण हुए हैं। इनमें 153 देशों के 4,856 खरीदार शामिल हैं। इस सम्मेलन में क्या खास है और भारतीय चावल कारोबार के लिए इसका क्या महत्व है। आइए, जानते हैं।
इस आयोजन में सबसे अहम सवाल यह है कि वर्ष 2027 में वैश्विक चावल बाजार में कीमतों का रुख क्या रहेगा। शुरुआती सत्र का विषय है, ‘2027 में वैश्विक चावल की मांग और आपूर्ति का अनुमान: कीमतों में गिरावट या तेजी का नया दौर?’ इसमें बासमती और गैर-बासमती चावल की संभावित कीमतों पर चर्चा होगी। इसके अलावा मांग, प्रतिस्पर्धा, लागत और भुगतान से जुड़े जोखिमों के आधार पर वर्ष 2027 के लिए चावल के 10 प्रमुख बाजारों की पहचान भी की जाएगी।
सम्मेलन में फसल सर्वेक्षण, कीमतों के पूर्वानुमान, निर्यात दस्तावेज, बीमा, ऋण, माल ढुलाई और गुणवत्ता प्रमाणन जैसे विषयों पर चर्चा होगी। सरकारी नीतियों, टिकाऊ उत्पादन और चावल मिलों की लाभप्रदता पर भी विचार किया जाएगा। आईआरईएफ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष देव गर्ग ने कहा, ‘2,038 बैठकें पहले ही तय हो चुकी हैं, इसलिए शुरुआत से ही सार्थक कारोबारी संपर्क पर ध्यान दिया जा रहा है।’
प्रदर्शनी के लिए लगातार दूसरे साल पूरी जगह बुक हो चुकी है। इसमें 180 से अधिक कंपनियां अपने उत्पाद और क्षमताएं प्रदर्शित करेंगी। भारत के 23 राज्यों के प्रतिभागी भी इसमें शामिल होंगे। सम्मेलन में नौ विशेष अनुभव क्षेत्र बनाए गए हैं, जिनमें ग्लोबल राइस आर्काइव भी शामिल है। यहां भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों की लगभग 200 चावल किस्मों को दिखाया जाएगा। इसके अलावा खेती से जुड़े समुदायों, खानपान और चावल के व्यावसायिक उपयोगों को भी सामने लाया जाएगा। 25 अक्तूबर को आम लोगों के लिए राइस फेस्टिवल आयोजित होगा, जिसमें आईटीसी होटल्स की खानपान गतिविधियां, शेफ प्रतियोगिताएं, इन्फ्लुएंसर्स के बीच कुकिंग मुकाबला, सांस्कृतिक कार्यक्रम और प्रश्नोत्तरी होंगी।
पिछले सम्मेलन का क्या रहा था परिणाम?
2025 में आयोजित पहले भारत अंतरराष्ट्रीय चावल सम्मेलन में 10,854 लोग पहुंचे थे। इनमें 90 से अधिक देशों के 1,083 अंतरराष्ट्रीय खरीदार शामिल थे। आयोजकों के हवाले से दी गई ईवाई की आयोजन के बाद की आकलन रिपोर्ट के मुताबिक, उस सम्मेलन में 33,453 करोड़ रुपये की कारोबारी प्रतिबद्धताएं दर्ज की गई थीं। ये प्रतिबद्धताएं लगभग 86.3 लाख टन चावल से जुड़ी थीं।






