जांच के बाद जेल भेजे गए इमरान खान: 6 डॉक्टरों की टीम ने किया चेकअप, नौ महीने बाद पत्नी और बहन से हुई मुलाकात

पीटीआई संस्थापक और पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को शिफा इंटरनेशनल अस्पताल में छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम द्वारा मेडिकल जांच के बाद वापस अदियाला जेल भेज दिया गया है। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, डॉक्टरों ने उन्हें हिरासत में रखना सुरक्षित बताया। सुप्रीम कोर्ट ने पहले उनकी स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए अस्पताल में जांच और इलाज का आदेश दिया था। सरकार ने इस फैसले के खिलाफ पुनर्विचार याचिका दायर की, जिसे रजिस्ट्रार कार्यालय ने आपत्तियों के साथ वापस कर दिया। इस बीच इमरान खान को बनी गाला भेजने और विदेश में इलाज कराने जैसे विकल्पों पर भी चर्चा शुरू हो गई है। पीटीआई का कहना है कि जेल की परिस्थितियां उनकी सेहत पर असर डाल रही हैं, जबकि पार्टी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश को उम्मीद की नई किरण बताया है।

छह विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम ने की जांच
जानकारी के मुताबिक, अस्पताल पहुंचने के बाद पूर्व प्रधानमंत्री की छह विशेषज्ञ डॉक्टरों वाली टीम ने मेडिकल जांच की। जांच पूरी होने के बाद डॉक्टरों ने निष्कर्ष निकाला कि इमरान खान को अस्पताल में भर्ती रखने की तत्काल जरूरत नहीं है और उन्हें जेल में सुरक्षित रखा जा सकता है। इसके बाद जेल अधिकारियों ने उन्हें वापस अदियाला जेल पहुंचाया, जहां उन्हें उनकी सेल में भेज दिया गया। इस दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे।

अस्पताल के बाहर भारी पुलिस बल तैनात
इमरान खान के अस्पताल पहुंचने से पहले इस्लामाबाद पुलिस के सीनियर अफसरों ने शिफा इंटरनेशनल अस्पताल का दौरा किया और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अस्पताल के बाहर भी बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई थी। अस्पताल सूत्रों के अनुसार, इमरान खान की मेडिकल जांच और जरूरत पड़ने पर उन्हें भर्ती करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए थे। जिसके बाद खान को इलाज के लिए भेजा गया।
सुप्रीम कोर्ट ने दो दिन में अस्पताल भेजने का दिया था आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने इमरान खान की स्वास्थ्य स्थिति पर विचार करने के बाद उन्हें दो दिनों के भीतर किसी चिकित्सा संस्थान में स्थानांतरित करने का आदेश दिया था। इसके बाद सरकार ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की। हालांकि, गुरुवार सुबह सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार कार्यालय ने कुछ आपत्तियां उठाते हुए सरकार की पुनर्विचार याचिका वापस कर दी।

2022 में सत्ता से हटने के बाद बढ़ीं कानूनी मुश्किलें
इमरान खान को अप्रैल 2022 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए प्रधानमंत्री पद से हटा दिया गया था। इसके बाद से उनके खिलाफ कई कानूनी मामले दर्ज हुए और उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती गईं। वह अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें कई मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। इमरान खान और उनकी पार्टी इन मामलों को राजनीतिक रूप से प्रेरित बताती रही है। पीटीआई का आरोप है कि इमरान खान को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाया जा रहा है। दूसरी ओर, सरकार और अभियोजन पक्ष उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को कानूनी प्रक्रिया का हिस्सा बताते रहे हैं।

नौ महीने बाद पत्नी और बहन से मिले इमरान
इमरान खान ने मंगलवार को अदियाला जेल में अपनी पत्नी बुशरा बीबी और बहन नोरीन नियाजी से मुलाकात की। रिपोर्ट के मुताबिक, इस साल यह पहली बार था जब उनकी परिवार के इन सदस्यों से मुलाकात हुई। इससे पहले करीब नौ महीने तक दोनों से उनकी मुलाकात नहीं हुई थी। एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने जेल सूत्रों के हवाले से बताया कि PTI प्रमुख ने अपनी बहन के साथ करीब 15 मिनट बातचीत की। वहीं, बुशरा बीबी के साथ उनकी मुलाकात लगभग 30 से 35 मिनट चली।

अल-कादिर ट्रस्ट मामले में 14 साल की सजा
2025 में इमरान खान को जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में दोषी ठहराते हुए 14 साल जेल की सजा सुनाई गई। अभियोजन पक्ष का आरोप था कि अल-कादिर ट्रस्ट के जरिए इमरान खान और उनकी पत्नी को रिश्वत के तौर पर जमीन मिली थी। इसके अलावा 2024 में उन्हें एक गोपनीय राजनयिक केबल सार्वजनिक करने के मामले में भी दोषी ठहराया गया था। यह केबल 2022 में वॉशिंगटन में पाकिस्तान के राजदूत ने इस्लामाबाद भेजी थी। हालांकि, तमाम कानूनी मामलों और जेल में लंबे समय से बंद रहने के बावजूद इमरान खान की राजनीतिक पकड़ खत्म नहीं हुई है। PTI के समर्थकों के साथ-साथ देश के युवा मतदाताओं के बीच भी उन्हें अब तक व्यापक समर्थन हासिल है।
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