नेपाल में बाढ़ और भूस्खलन ने फिर से भारी तबाही मचाई है। गोरखा जिले में रविवार तड़के करीब 4:30 बजे आई बाढ़ में 45 मकान और छह पुल बूढ़ी गंडकी नदी में समा गए। जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचा है। सैलाब में 10 लापता हैं। सेना ने 9 विदेशी समेत 82 लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया है। अधिकारियों ने नदी किनारे रहने वालों को ऊंचाई वाले स्थानों पर जाने को कहा है।
चुमनुब्री ग्रामीण नगरपालिका के अध्यक्ष नीमा लामा ने बताया कि भूस्खलन के कारण चुमके खोला नामक जलधारा का प्रवाह बाधित हो गया था। इसके बाद पानी का बहाव बढ़ा और अचानक बाढ़ की स्थिति पैदा हो गई। इस घटना के कारण नदी के आसपास रहने वाले लोगों के लिए खतरा बढ़ गया।
प्रशासन को आशंका है कि तेज बहाव से नदी के किनारे बसे अन्य इलाकों में भी नुकसान हो सकता है। बाढ़ में 341 मेगावाट की जलविद्युत परियोजना के मुख्य कैंप और निर्माण उपकरण भी बह गए। इसके अलावा दो टेलीफोन टावर और बिजली के 50 खंभे गिरने से संचार एवं विद्युत आपूर्ति के बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है।
437 सुरक्षाकर्मी और चार हेलिकॉप्टर बचाव कार्य में जुटे
घटना के बाद प्रभावित क्षेत्रों में खोज और बचाव अभियान शुरू कर दिया गया है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल के 437 सुरक्षाकर्मियों और चार हेलिकॉप्टर को राहत और बचाव कार्य में उतारा गया है। इसके अलावा नेपाल पुलिस के 50 कर्मियों की एक टीम को तैयार रखा गया है। प्रभावित क्षेत्रों से अब तक 82 लोगों को निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
बाढ़ के बाद प्रशासन ने बूढ़ी गंडकी नदी के किनारे स्थित बस्तियों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है। लोगों से नदी के करीब जाने से बचने और सुरक्षित ऊंचे स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। प्रशासन की प्राथमिकता नदी किनारे बसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों की स्थिति का आकलन करना है।
बिहार में भी बाढ़ का खतरा बढ़ा
बिहार में भी खतरा बढ़ गया है। अधिकारियों ने कहा कि यह नदी आगे चलकर त्रिशूली से मिलती है। फिर दोनों का पानी देवघाट के पास नारायणी नदी में पहुंचता है। यही नदी भारत में गंडक के नाम से बिहार में आती है और आगे गंगा में मिल जाती है। अगर पानी का बहाव बढ़ता है, तो बिहार के कई जिलों में बाढ़ आ सकती है।






