दिल्ली में शनिवार को हुए व्यापक विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ पर भारत और संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार कार्यालय (OHCHR) के बीच जुबानी टकराव सामने आया है। भारत ने प्रदर्शनकारियों की सामूहिक हिरासत को लेकर संयुक्त राष्ट्र की चिंता पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे देश के आंतरिक मामलों में अनुचित हस्तक्षेप करार दिया है।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय ने दिल्ली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों, आंदोलन के नेताओं, नागरिक समाज संगठनों के सदस्यों, वकीलों और पत्रकारों को हिरासत में लिए जाने की खबरों पर चिंता जताई थी। इसके जवाब में भारत ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देश के संविधान के तहत सुरक्षित है, लेकिन लोकतंत्र में इस अधिकार का इस्तेमाल सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए निर्धारित उचित प्रतिबंधों के अधीन होता है।
दिल्ली में करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लेने का दावा
यह पूरा विवाद दिल्ली में एक विरोध प्रदर्शन को लेकर शुरू हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, दिल्ली पुलिस ने करीब 3,000 लोगों को हिरासत में लिया। इनमें प्रदर्शनकारी, संबंधित राजनीतिक संगठन के समर्थक और विपक्षी नेता शामिल थे। ये लोग मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पहुंचकर धरना देना चाहते थे।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने की अनुमति के लिए दिए गए आवेदन को अस्वीकार कर दिया था। इसके बाद राजधानी में प्रदर्शनकारियों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए सुरक्षा और परिवहन संबंधी प्रतिबंध लगाए गए। प्रदर्शनकारियों की भीड़ को दिल्ली पहुंचने से रोकने के लिए इंटरनेट और परिवहन सेवाओं पर भी पाबंदियां लगाई गईं। इनमें दिल्ली मेट्रो, बस और रेल सेवाओं से संबंधित प्रतिबंध शामिल थे।
दिल्ली पहुंचते ही प्रदर्शन से जुड़े नेताओं को हिरासत में लिया गया
शनिवार सुबह मुंबई से दिल्ली पहुंचे सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दिपके और दो अन्य नेताओं, सौरव दास तथा आशुतोष रांका को उनकी उड़ान के उतरने के कुछ समय बाद हिरासत में ले लिया गया। पुलिस की कार्रवाई के बाद अधिकांश हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा कर दिया गया।
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय के प्रवक्ता थामीन अल-खीथान ने शनिवार को जारी बयान में दिल्ली में बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों से पहले और उनके दौरान सामूहिक हिरासत की खबरों पर चिंता जताई। उन्होंने भारतीय अधिकारियों से शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने के अधिकार का पूरी तरह सम्मान सुनिश्चित करने की अपील की।
संयुक्त राष्ट्र ने यह भी कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शनों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंधों को आवश्यकता और आनुपातिकता की कड़ी कसौटियों पर खरा उतरना चाहिए। अल-खीथान ने कानून लागू करने वाले अधिकारियों से प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई करते समय अधिकतम संयम बरतने का आग्रह किया। साथ ही, उन्होंने संबंधित चिंताओं को दूर करने के लिए सार्थक संवाद शुरू करने की सलाह दी।





