शीतकालीन सत्र-  सदन में वंदे मातरम पर चर्चा, CM योगी बोले-विरोध करने वालों को मांगनी चाहिए माफी

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यूपी विधानसभा में शीतकालीन सत्र की कार्यवाही जारी है। सदन में वंदे मातरम पर चर्चा की जा रही है। इससे पहले 24,496.98 करोड़ का अनुपूरक बजट पेश किया गया है।

 

वंदे मातरम के उद्घोष के साथ शिवपाल सिंह ने शुरू किया संबोधन

शिवपाल सिंह ने वंदे मातरम को नमन करते हुए इसके उद्घोष के साथ अपने संबोधन की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि इतिहास को आधा-अधूरा देखना या दिखाना ठीक नहीं है। न जाने क्यों लोग इसे राजनीति में घसीट रहे हैं। आश्चर्य इस बात का है कि जो लोग आज घंटों वंदे मातरम पर बोल रहे हैं, उन लोगों के पूर्वज उस समय कहां थे जब स्वतंत्रता सेनानी लाठी खा रहे थे। सरकार स्कूलों में इसे अनिवार्य करने की बात करती है। लेकिन, जब बच्चे के पेट में भोजन नहीं होगा, तब क्या उसके मुंह से आवाज निकलेगी।

वंदे मातरम की एक पंक्ति ने नई चेतना का संचार किया-सीएम

संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने वंदे मातरम पर अहम जानकारी साझा करके कार्यावही आगे बढ़ाई। इसके बाद सीएम योगी ने वंदे मातरम गीत पर अपनी बात रखी। 1896 में कांग्रेस के अधिवेशन में इसे रवींद्र नाथ टैगोर का स्वर मिला। तब यह गीत पूरे देश का एक स्वर बन गया था। वंदे मातरम के शताब्दी समारोह के दौरान कांग्रेस ने इमरजेंसी लगाकर गला घोंट दिया था। आज वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। आज पूरी दुनिया के सामने भारत विकसित भारत की संकल्पना के साथ आगे बढ़ रहा है। तब इस गीत के रचयिता बंकिम चंद्र चटोपाध्याय का सपना आज के एक भारत… श्रेष्ठ भारत की संकल्पना के साथ आगे बढ़ा है।

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सीएम ने आगे कहा कि वंदे मातरम की एक पंक्ति ने नई चेतना का संचार किया। फांसी के फंदे पर चढ़कर भी स्वतंत्रता सेनानियों का अंतिम उद्घोष था ‘वंदे मातरम’। महात्मा गांधी ने इसे शुद्धतम गीत माना। वंदे मातरम को राष्ट्रगीत और सयुंक्त प्रांत को उत्तर प्रदेश के रूप में एक साथ अनुमति मिली। दुर्भाग्यपूर्ण था कि अंग्रेजों का विरोध करने वाली कांग्रेस भी दबाव में झुकती दिखी। भारत की आजादी को दिशा देने वाले मंत्र वंदे मातरम कांग्रेस की तुष्टीकरण का पहला और सबसे बड़ा शिकार बनी था। छह छंदों वाले राष्ट्रगीत को काटकर दो छंदों में सीमित कर देना किसी मजहबी मजबूरी का नतीजा या सत्ता के लिए राष्ट्र चेतना को गिरवी रखने जैसा था।

सीएम योगी ने कहा कि मोहम्मद अली जिन्ना ने इस पर खुलकर जहर दिया। कांग्रेस से अलग होने के बाद जिन्ना ने इसे मजहबी रंग दिया। 1935 में जिन्ना ने इसके खिलाफ नारा बुलंद किया। उस समय पीएम जवाहरलाल नेहरू थे। 26 अक्तूबर 1920 कांग्रेस ने इसे छोटा करने का निर्णय लिया। जब तुष्टिकरण के नीचे राष्ट्रभक्ति को पूरी तरह कैद करके रखने का दुस्साहस किया गया, तब भारत के विभाजन की नींव पड़ी। जो लोग इस गीत का विरोध कर रहे उन्हें देशवासियों से माफी मांगनी चाहिए।

सीएम ने पूरे सदन से अनुरोध किया कि जिस आनंदमठ उपन्यास का यह गीत है, उस उपन्यास को सभी को देखना चाहिए। वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर हम लोग संकल्प ले कि वंदे मातरम केवल अतीत की स्मृति न रहे। बल्कि हम सभी के लिए भविष्य का भी संकल्प बने।

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सीएम योगी ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया

सीएम योगी ने विपक्ष के सवालों का जवाब दिया। डॉक्टर की सलाह से कफ सिरप हर व्यक्ति लेता है। कोडीनयुक्त सिरप से मौतों के मामले अन्य राज्यों से आए हैं। यूपी में यह प्रतिबंधित है। प्रदेश में मौत के मामले सामने नहीं आए हैं।

यूपी में 136 फर्मों के खिलाफ एनडीपीएस के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। कोर्ट ने भी सरकार की कार्रवाई को सही माना है। अब तक बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां हुई हैं। 77 अभियुक्तों को अब तक गिरफ्तार किया जा चुका है। अन्य के खिलाफ भी कार्रवाई जारी है। सीएम ने कहा कि यूपी का सबसे बड़ा स्टाकिस्ट शुभम जायसवाल, कैंट वाराणसी से सपा के प्रत्याशी अमित यादव का व्यापारिक साझेदार है। मिलिंद यादव भी शुभम का साझेदार है।

सीएम ने आगे कहा कि अमित यादव और मिलिंद यादव के पत्नी के खातों से शुभम के खाते से बैंक ट्रांजेक्सन भी आए हैं। आलोक सिपाही पक्का सपाई है। अखिलेश यादव को गिफ्ट देते उसकी फोटो भी है। अपराधी के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि जब कार्रवाई होगी तो आप लोग (सपा के लोग) ही फातिया पढ़ने जाएंगे। लेकिन, हम वह भी मौका नहीं देंगे।


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