देहरादून- प्रदेश के 4 जिलों के हिमाच्छादित क्षेत्रों में शुरू हुई डिजिटल स्व-गणना, 40 सवालों से न कतराएं

उत्तराखंड के चार जिलों रुद्रप्रयाग, चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी के हिमाच्छादित क्षेत्रों में सोमवार से डिजिटल स्व-गणना शुरू हो गई है। जनगणना के दूसरे चरण के तहत देशभर में होने वाली गणना से पहले हिमाच्छादित क्षेत्रों में ये जनगणना कराई जा रही है।

उत्तराखंड के इन दुर्गम क्षेत्रों में कुल 52,000 की अनुमानित आबादी को कवर किया जाएगा। इसमें कुल चार जिले, 11 चार्ज और लगभग 131 गांव व 3 नगर (गंगोत्री, बदरीनाथ और केदारनाथ के नगर पंचायत क्षेत्र) शामिल हैं। उत्तरकाशी में मोरी, राजगढ़ी और भटवाड़ी (अनुमानित आबादी 40,000), चमोली में ज्योतिर्मठ और चमोली (अनुमानित आबादी 3,000), रुद्रप्रयाग में ऊखीमठ (अनुमानित आबादी 200) और पिथौरागढ़ में मुनस्यारी व धारचूला (अनुमानित आबादी 9,000) में ये जनगणना हो रही है।

इसके तहत 17 अगस्त से 31 अगस्त के बीच वेबसाइट के माध्यम से स्व-गणना होगी। एक से 30 सितंबर के बीच घर-घर जाकर गणना कराई जाएगी। एक से पांच अक्तूबर तक संशोधन का दौरा चलेगा। जनगणना का समय एक अक्तूबर 2026 की रात 12 बजे रखा गया है। इस बार की जनगणना पूरी तरह से डिजिटल माध्यम से संपन्न हो रही है।

 

 

ऐसे करें स्व-गणना

इसके लिए सबसे पहले वेबसाइट se-snowbound.census.gov.in पर जाएं। यहां अपने मोबाइल नंबर के माध्यम से लॉगिन करना है। वहीं मोबाइल नंबर, जो आपने जनगणना के पहले चरण में इस्तेमाल किया था। इसके बाद अपने पते से मोबाइल के माध्यम से ही गूगल लोकेशन सबमिट करनी होगी। इसके बाद आपकी स्क्रीन पर एक-एक कर सवाल आते जाएंगे। 40 सवालों का जवाब देने के बाद आपको एक आईडी मिलेगी। जब प्रगणक आपके घर आएंगे तो उन्हें ये एसई आईडी देनी होगी। वह आपके सवालों के जवाब का सत्यापन करेंगे और आपकी गणना पूरी हो जाएगी।

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40 सवालों से न कतराएं, हो सकती है कार्रवाई

जनगणना अधिनियम, 1948 की धारा-8 के तहत जनगणना अधिकारियों को प्रश्न पूछने का अधिकार है। प्रत्येक व्यक्ति के लिए इन प्रश्नों के सत्य और सही उत्तर देना कानूनी रूप से अनिवार्य है। धारा-9 के तहत मकान या परिसर के कब्जाधारक का कर्तव्य है कि वे जनगणना अधिकारियों को उचित प्रवेश दें। पहचान के लिए आवश्यक अंक या संख्याएं अंकित करने की अनुमति दें। वही, धारा-11 के तहत ड्यूटी से इनकार करने, झूठी जानकारी देने या जनगणना कार्य में बाधा डालने पर 1,000 रुपये तक का जुर्माना और गंभीर मामलों में तीन साल तक की कैद का प्रावधान है।

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