जलवायु परिवर्तन की वजह से हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र में बर्फ, ग्लेशियर और स्थायी हिम से जुड़े तंत्र यानी क्रायोस्फीयर में तेजी से बदलाव हो रहे हैं। अगर यही स्थिति जारी रही तो इसका असर न केवल हिमालय के पर्यावरण पर पड़ेगा बल्कि एशिया की प्रमुख नदियों और करोड़ों लोगों की जल सुरक्षा पर भी गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। इससे आपदाओं का भी खतरा बढ़ गया है।
यह बातें मूल रूप से चमोली निवासी मिजोरम विश्वविद्यालय के प्रो. विश्वंभर प्रसाद सती और सुरजीत बनर्जी की ओर से किए गए एक हालिया शोध में सामने आई हैं जो अंतरराष्ट्रीय जर्नल अर्थ साइंस रिव्यूज में प्रकाशित हुआ है। शोध के अनुसार हिंदुकुश-हिमालय क्षेत्र जिसे अक्सर तीसरा ध्रुव और एशिया का जल टावर कहा जाता है, जलवायु परिवर्तन की वजह से तेजी से क्रायोस्फेरिक बदलावों का सामना कर रहा है।







