चुनौती: हरियाणा में 52 करोड़ जुर्माना, फिर भी धधक रहे कूड़े के ढेर, सर्दियों में घातक होने लगती है समस्या

हरियाणा में कूड़ा प्रबंधन की व्यवस्था ही बदहाल है। इसका नतीजा है कि खुले में कचरा डाला जाता है और खुलेआम इसे आग भी लगा दी जाती है। जुर्माना लगाने के बाद भी खुले में कचरा डालने और आग लगाने पर रोक नहीं लग पा रही है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार 2023 से अप्रैल 2026 तक प्रदेश के 16 शहरी निकायों और आठ निजी एजेंसियों पर 52.36 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया गया। इसके बावजूद प्रदेश में कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण की व्यवस्था पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो पाई है।

इसी अवधि में अवैध रूप से कचरा डालने पर 7705 चालान किए गए हैं और 63.19 लाख रुपये का पर्यावरण मुआवजा भी लगाया गया। इसमें से 58.91 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है। खुले में कूड़ा जलाने के मामलों में 469 चालान किए गए। प्लास्टिक कचरे के नियमों के उल्लंघन पर तीन वर्ष में 27 हजार से अधिक चालान किए गए।
हर बार बढ़ेगा जुर्माना, नहीं देने पर राजस्व की तरह वसूली
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के नियमानुसार सार्वजनिक या सरकारी जमीन पर कचरा डालने पर पहली बार पांच हजार, दूसरी बार 10 हजार और गंभीर उल्लंघन पर 25 हजार रुपये या उससे अधिक का पर्यावरण मुआवजा लगाया जा सकता है। इसमें ग्राम पंचायत, नगर परिषद, सरकारी विभाग और आम व्यक्ति भी शामिल हैं। तय समय में जुर्माना जमा नहीं करने पर इसकी वसूली भूमि राजस्व के बकाये की तरह होगी।
87 निकाय-11 क्लस्टर, लेकिन वैज्ञानिक निस्तारण में पिछड़े
हरियाणा के 87 शहरी निकायों को 11 कचरा प्रबंधन क्लस्टरों में बांटा गया है। सोनीपत-पानीपत और करनाल-कैथल-थानेसर क्लस्टर को संचालन की अनुमति मिली है। सरकारी पोर्टल के अनुसार प्रदेश में सिर्फ 25 फीसदी लोग गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग करके देते हैं। कैग ने 18 निकायों की जांच के बाद रिपोर्ट दी कि 16 के पास चालू सैनिटरी लैंडफिल नहीं है।

जिलों में टास्क फोर्स की निगरानी
कचरा निस्तारण की निगरानी के लिए जिलों में बनाई गई विशेष टास्क फोर्स में प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं। यह टीम कचरा डालने के अवैध स्थानों, खुले में जलाने और निस्तारण केंद्रों का निरीक्षण करती है। नियम तोड़ने वालों की पहचान कर चालान और जुर्माने की कार्रवाई सुनिश्चित करती है।

कूड़ा निस्तारण के लिए सरकारी प्रयास 

  • प्रदेश के सभी 87 शहरी निकायों में डोर-टू-डोर कूड़ा उठाने का दावा है। शहरी निकाय विभाग के अनुसार रोजाना करीब 6,060 मीट्रिक टन कचरे का प्रसंस्करण (प्रोसेसिंग) किया जा रहा है। कचरा प्रबंधन के लिए 11 इंटीग्रेटेड सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट क्लस्टर बनाए गए हैं।
  • पुराने डंपिंग स्थलों पर वर्षों से जमा कचरे को बायोमाइनिंग और बायोरिमेडिएशन तकनीक से हटाने का प्रावधान है। इस कचरे से उपयोगी सामग्री अलग करने और बची जमीन को दोबारा इस्तेमाल लायक बनाने का लक्ष्य है। इसके लिए स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत काम किया जा रहा है।
  • 30 जून 2024 को सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट मॉनिटरिंग पोर्टल शुरू किया गया। इसमें कचरा उठाने, सफाई कर्मचारियों की उपस्थिति और कचरा प्रोसेसिंग की निगरानी होती है। ई-समाधान एप से नागरिक शिकायत दर्ज करा सकते हैं। प्रदेशभर में सितंबर 2026 तक 1,646 वार्ड कमेटियां गठित की गईं। जीपीएस युक्त वाहनों से कचरा उठाने और ऑनलाइन ट्रैकिंग के आधार पर भुगतान की व्यवस्था भी घोषित की गई है।
और पढ़े  झोटा हत्याकांड: कैबिनेट से बातचीत पर अड़ा परिवार, 21 दिन बाद भी संस्कार नहीं, राहुल गांधी पर क्या बोले पिता

घर से शुरू हो कचरे की छंटाई : विशेषज्ञ
पर्यावरण अनुसंधान पर काम करने वाले संगठन एनवायर कैटालिस्ट्स के संस्थापक और प्रमुख विश्लेषक सुनील दहिया ने कहा, कचरे का निस्तारण घर से ही शुरू होना चाहिए। गीले, सूखे और घरेलू खतरनाक कचरे को अलग-अलग रखना जरूरी है। गीले कचरे से खाद या बायोगैस बनाएं, सूखे कचरे की रिसाइक्लिंग हो और बाकी कचरे का वैज्ञानिक तरीके से सुरक्षित निस्तारण किया जाए। खुले में कचरा जलाना पूरी तरह बंद होना चाहिए।

कूड़े की आग में घुल रहा जहर, हवा से पानी तक खतरा
पीजीआई चंडीगढ़ में सामुदायिक चिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. रविंद्र खैवाल के मुताबिक घरेलू कचरे में प्लास्टिक, रबर और रसायन जलने से पीएम 2.5, पीएम 10, कार्बन मोनोऑक्साइड और जहरीले धुएं का उत्सर्जन होता है। औद्योगिक कचरे से भारी धातुएं और रासायनिक प्रदूषक मिट्टी व भूजल में पहुंच सकते हैं। ई-वेस्ट को खुले में जलाने या तोड़ने से सीसा, पारा और कैडमियम जैसे विषैले तत्व निकलते हैं। इनसे फेफड़ों, तंत्रिका तंत्र और आंखों पर गंभीर असर पड़ सकता है।

 

कचरे से बिजली व कम्प्रेस्ड बायो गैस बनाकर करेंगे स्थायी समाधान : सांगवान
हरियाणा स्वच्छ भारत मिशन (शहरी) के निदेशक शाश्वत सांगवान के मुताबिक कचरे के स्थायी समाधान के लिए कास्बड़ी परियोजना पर काम शुरू किया जाएगा। राज्य में फिलहाल वेस्ट टू एनर्जी और कम्प्रेस्ड बायोगैस परियोजनाओं पर काम होगा। अंबाला, पंचकूला और यमुना नगर निकायों के लिए अंबाला में प्लांट स्थापित करने पर काम होना है। मानेसर में मानेसर नगर निगम और गुरुग्राम के लिए प्लांट लगाया जाएगा। फरीदाबाद और हिसार में भी प्लांट स्थापित होगा। शहरों से निकलने वाले कचरे से निजी कंपनी बिजली व कम्प्रेस्ड बायो गैस बनाएंगी। इससे कचरा निस्तारण का स्थायी समाधान होगा।

  • Related Posts

    चेतावनी: पराली के धुएं से पंजाब की हवा में घुला ब्लैक कार्बन, दिल्ली तक पहुंचा धुआं, हरियाणा-UP भी प्रभावित

    पंजाब में पराली जलाने से हवा में हानिकारक ब्लैक कार्बन की मात्रा बढ़ा रही है। इसका असर सेहत पर पड़ रहा है। पीयू, पीजीआई और आईआईटी दिल्ली की स्टडी में…

    झोटा हत्याकांड: कैबिनेट से बातचीत पर अड़ा परिवार, 21 दिन बाद भी संस्कार नहीं, राहुल गांधी पर क्या बोले पिता

    मानसा में मारे गए एंटी ड्रग एक्टिविस्ट परविंदर सिंह झोटा का 21वें दिन बाद भी अंतिम संस्कार नहीं हो पाया। कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने सोमवार को झोटा के…