साल 2100 तक धरती से इंसान विलुप्त हो सकते हैं। यह दावा हुआ है चिकित्सा क्षेत्र से जुड़ी सबसे प्रतिष्ठित मैगजीन लैंसेट की एक रिपोर्ट में। वैश्विक जोखिम के विश्लेषण से जुड़ी इस रिपोर्ट में अगली सदी तक मानव जाति के लिए सबसे बड़े खतरों को चिह्नित करने का लक्ष्य रखा गया था। इस रिपोर्ट में जिन कारणों को इंसानों के लिए सबसे खतरनाक करार दिया गया है, उनमें परमाणु युद्ध और कृत्रिम बुद्धिमता यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को उच्च स्तर पर रखा गया है। इसके साथ ही 17 अन्य खतरों को इंसानों की विलुप्ति के संभावित कारण के तौर पर शामिल किया गया है।
2. परमाणु संघर्ष और ‘परमाणु अकाल’
वजह: वैश्विक शक्तियों के बीच बड़े पैमाने पर परमाणु युद्ध होना।
खतरा क्यों: परमाणु विस्फोटों से पैदा हुआ धुआं और राख के कण वायुमंडल की ऊपरी परत में जमा हो जाएंगे, जो सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुंचने से रोक देंगे। नतीजतन तापमान में जबरदस्त गिरावट आएगी और व्यापक परमाणु अकाल की स्थिति पैदा होगी, जिससे वैश्विक खाद्य आपूर्ति ठप हो जाएगी और इंसानों की भुखमरी से मौत हो सकती है।
क्या हैं रिपोर्ट में सुझाए गए उपाय?
1. संस्थागत और सामाजिक सुधार की जरूरत
- सरकारों और बहुपक्षीय संस्थानों को केवल निकट भविष्य और अपने स्थानीय दायरे तक सीमित रहने के बजाय दीर्घकालिक पूर्वानुमान और नियमित जोखिम आकलन प्रणाली अपनाने की सलाह दी गई है।
- नीतियों के प्रभावी क्रियान्वयन और संकटों से निपटने के लिए सामाजिक व संस्थागत विश्वास को मजबूत करना एक अहम आधार माना गया है।
- ऐसे जटिल खतरों के लिए, जिन्हें कोई भी देश अकेले हल नहीं कर सकता, प्रभावी अंतरराष्ट्रीय शासन और बहुपक्षीय सहयोग स्थापित करना अनिवार्य है।
- असमानता घटाने वाली नीतियां लागू करना, टिकाऊ व लचीली खाद्य प्रणालियां बनाना और गुणवत्ता वाली किफायती स्वास्थ्य कवरेज को अहम बताया गया है।
2. खतरों का पता लगाकर पहले से कार्रवाई की तैयारी
रिपोर्ट में जोर दिया गया है कि केवल आपदा आने के बाद प्रतिक्रिया देने के बजाय, जोखिमों के गंभीर संकट में बदलने से पहले ही पूर्व-अनुमान लगाकर कदम उठाए जाने चाहिए।





