हार्ट अटैक आने से पहले ही मिल जाएगा अलार्म, ये टेस्ट बता देंगे कहीं आपको भी तो नहीं है खतरा?

 

हृदय स्वास्थ्य से संबंधित समस्याएं अब हर उम्र के लोगों को अपना शिकार बनाती जा रही हैं, बच्चे भी इससे सुरक्षित नहीं हैं। हाल के दिनों में आपने भी कई ऐसी खबरें पढ़ी-सुनी होंगी जिसमें 20 से कम उम्र के लोगों को न सिर्फ हार्ट अटैक हो रहा है बल्कि इससे मौत का खतरा भी बढ़ गया है। डॉक्टर कहते हैं, इस तरह की दिक्कतें किसी को भी हो सकती हैं, भले ही आप अभी स्वस्थ हैं फिर भी हृदय रोगों के खतरे को अनदेखा नहीं किया जा सकता है।

ऐसे में सवाल है कि क्या कोई ऐसा तरीका है जिसकी मदद से पहले से ये जाना जा सके कि आपको हार्ट अटैक का खतरा तो नहीं है? नियमित रूप से कौन से टेस्ट इसमें आपकी मदद कर सकते हैं? आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।

 

हृदय संबंधित रोगों का बढ़ता खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आज की तेज रफ्तार जिंदगी, तनाव-खानपान और घटती शारीरिक सक्रियता के चलते दिल की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। हार्ट अटैक और कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थितियां जो पहले सिर्फ बुजुर्गों से जुड़ी समस्याएं मानी जाती थीं, अब युवा भी इनका शिकार हो रहे हैं।

कई बार ये समस्याएं बिना किसी चेतावनी के सामने आती हैं, लेकिन अच्छी बात ये है कि कुछ खास मेडिकल टेस्ट के जरिए इनका खतरा समय से पहले ही पहचाना जा सकता है।

अध्ययन करते रहे हैं अलर्ट

द लैंसेंट में प्रकाशित साल 2021 की रिपोर्ट के अनुसार भारत में कार्डियक अरेस्ट से हर साल 60 लाख से ज्यादा लोगों की जान जाती है। वहीं भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के डेटा से पता चलता है कि युवाओं में हार्ट अटैक के 30% मामले 40 साल से कम उम्र के लोगों में देखे जा रहे हैं जो काफी चिंताजनक है।

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डॉक्टर्स कहते है, अगर नियमित जांच की आदत बना ली जाए तो 80% तक कार्डियोवैस्कुलर घटनाओं से बचाव किया जा सकता है।

 

आइए जानते हैं कि दिल से संबंधित समस्याओं, हार्ट अटैक के खतरे का पहले से पता लगाने के लिए कौन से टेस्ट कराने से मदद मिल सकती है?

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) और इकोकार्डियोग्राम (इको) टेस्ट

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दिल की धड़कन और दिल में इलेक्ट्रिकल एक्टिविटी का पता लगाने के लिए ईसीजी टेस्ट कराया जाता है। इससे धड़कनों में अनियमितता या फिर हार्ट अटैक की पहचान की जा सकती है। वहीं दिल की मांसपेशियों और वाल्व की कार्यक्षमता जांचने के लिए अल्ट्रासाउंड आधारित इको टेस्ट किया जाता है। इससे दिल की पंपिंग क्षमता और संरचना की गड़बड़ी का पता चलता है।

ये दोनों टेस्ट दिल की सेहत को बेहतर तरीके से समझाने में मदद करते हैं।

 

टीएमटी (ट्रेडमिल टेस्ट)

टीएमटी एक बहुत कॉमन टेस्ट है जो हार्ट की स्थिति का पता लगाने के लिए किया जाता है। ये एक नैदानिक प्रक्रिया है जिसका उपयोग शारीरिक तनाव के प्रति हृदय की प्रतिक्रिया का आकलन करने के लिए किया जाता है। दौड़ते या तेज चलने के दौरान ईसीजी मॉनिटर कर यह देखा जाता है कि एक्सरसाइज के दौरान दिल कैसे प्रतिक्रिया करता है? इस टेस्ट की मदद से हृदय में ऑक्सीजन सप्लाई का संकेत मिल सकता है।

 

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट

लिपिड प्रोफाइल टेस्ट हृदय की सेहत के बारे में जानने के लिए किया जाने वाला सबसे आम टेस्ट है। ये खून में कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स का स्तर दिखाता है। ज्यादा कोलेस्ट्रॉल धमनियों में प्लाक जमाने लगता है। इस टेस्ट की मदद से ये जाना जा सकता है कि कहीं आपके खून में भी तो इनकी मात्रा अधिक नहीं है?

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 40 साल से ऊपर सभी पुरुष और महिलाओं को अपने डॉक्टर की सलाह पर नियमित रूप से टेस्ट कराते रहने चाहिए। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को दिल की बीमारी रही हो या फिर आप डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर- हाई कोलेस्ट्रॉल से परेशान रहते हो तो डॉक्टर की सलाह पर नियमित जांच और भी जरूरी हो जाता है।

 

नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

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