आदेश- दुष्कर्म पीड़िता को मिली गर्भ गिराने की अनुमति, 18 घंटे डाॅक्टरों की निगरानी में रहेगी युवती, जानें…

 

हाईकोर्ट के आदेश पर छुट्टी के दिन कोर्ट खोलकर 23 वर्षीय दुष्कर्म पीड़िता को गर्भ गिराने की अनुमति के बाद सीएमओ की देखरेख में बुधवार शाम पांच बजे उसे महिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। 22 सप्ताह के गर्भ के मेडिकल टर्मिनेशन के दौरान पांच डॉक्टरों की देखरेख में पीड़िता 18 घंटे भर्ती रहेगी।

सीएमओ ने यह पैनल गठित किया है। गर्भपात की प्रक्रिया से पहले दो स्त्री रोग विशेषज्ञों को पीड़ित महिला की देखरेख में लगाया गया है। इनके अलावा एक फिजिशियन, एक एनेस्थेटिस्ट और एक सर्जन को मेडिकल बोर्ड में रखा गया है। पीड़िता को अस्पताल में भर्ती कराने के दौरान सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह खुद मौजूद रहे।

सीएमएस डॉ. निर्मला पाठक ने पर्यवेक्षण भर्ती व आगे की प्रक्रिया के लिए चिकित्सकीय दस्तावेज तैयार किए। पीड़िता 22 सप्ताह की गर्भवती है। गर्भ गिराने के बाद भ्रूण को सुरक्षित रखा जाएगा और उसका डीएनए परीक्षण होगा। सैंपल को लखनऊ कार्यशाला में भेजा जा सकता है।

बृहस्पतिवार को 22 सप्ताह के गर्भ का मेडिकल टर्मिनेशन होने के बाद डॉक्टर सीएमओ को रिपोर्ट देंगे। यह रिपोर्ट कोर्ट को सौंपी जाएगी। इसके साथ ही डीएनए परीक्षण के लिए भ्रूण से सैंपल लिया जाएगा। डीएम अनुज सिंह ने बताया कि पीड़िता व उनके अधिवक्ता प्रार्थनापत्र लेकर उनके पास आए थे।

नियम के मुताबिक उन्हें गर्भ गिराने के बाद भ्रूण सुरक्षित रखने के लिए कोर्ट से अनुमति लेने के लिए कहा गया था। डीएम का कहना है कि विशेषज्ञों की देखरेख में चिकित्सकीय प्रक्रिया पूरी की जा रही है। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग रिपोर्ट संबंधित न्यायालय को सौंपेगा। 

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यह है पूरा मामला 
करीब एक माह पहले मुगलपुरा क्षेत्र में रहने वाली युवती ने थाने में नागफनी क्षेत्र के युवक के खिलाफ केस दर्ज कराया था जिसमें पीड़िता ने बताया कि आरोपी ने उसके साथ दुष्कर्म किया और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल भी किया। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

दुष्कर्म की घटना में युवती गर्भवती हो गई थी। युवती ने अनचाहा गर्भ गिराने के लिए अपने अधिवक्ताओं के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की। उस वक्त युवती 18 सप्ताह तीन दिन की गर्भवती थी।

दो दिन में अदालत को सौंपी गई रिपोर्ट
कोर्ट के आदेश पर 17 अक्तूबर को सीएमओ के निर्देश में मेडिकल बोर्ड का पैनल गठित हुआ। युवती की उम्र और गर्भ को लेकर रिपोर्ट तैयार की गई। इसके बाद 19 अक्तूबर को रिपोर्ट अदालत को सौंपी गई। पीड़िता के अधिवक्ताओं ने एक्ट में संशोधन के तहत न्यायमूर्ति से गर्भ गिराने की अनुमति मांगी गई।

इसके बाद न्यायमूर्ति ने मुरादाबाद की सीजेएम को शक्तियां निहित करते हुए इस मामले की सुनवाई को कहा। मंगलवार को छुट्टी होने के बाद कोर्ट लगी और मुरादाबाद की मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते हुए मंगलवार को पीड़ित को गर्भ गिराने की अनुमति दे दी। इसके अलावा भ्रूण को सुरक्षित रखने और डीएनए सैंपल के आदेश भी दिए गए हैं।

प्रक्रिया में लगे चार हफ्ते
अनचाहा गर्भ गिराने के लिए युवती ने अपने अधिवक्ताओं के जरिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। उस वक्त युवती 18 सप्ताह तीन दिन की गर्भवती थी। मंगलवार को हाईकोर्ट के आदेश पर युवती को गर्भ गिराने की अनुमति मिल गई। इस प्रक्रिया में करीब चार हफ्ते लग गए। अब युवती 22 सप्ताह की गर्भवती हो चुकी है।

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