विदेश में बैठकर भारत में गैंग चला रहे गैंगस्टरों की अब खैर नहीं है। दिल्ली पुलिस विदेश में बैठे गैंगस्टरों के खिलाफ नए भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) के तहत ट्रायल इन एब्स्टेन्शिया (ट्रायल इन एब्सेंस) कानून लगाएगी। इसके तहत गैंगस्टरों व बदमाशों पर मकोका लगाया जाएगा। इस कानून के तहत गैंगस्टरों को दोषी ठहराया जा सकेगा जिससे भारत में उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। इस कानून को लागू करने वाली दिल्ली पुलिस देश की पहली पुलिस बन गई है।
दिल्ली पुलिस गैंगस्टर के खिलाफ मकोका लगा रही है। विदेश में बैठै गैंगस्टर के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 356 लगाने की शुरूआत कर दी गई है।
देवेश चंद्र श्रीवास्तव, विशेष पुलिस आयुक्त, अपराध शाखा, दिल्ली पुलिस, प्रक्रिया और सुरक्षा उपाय
मुकदमा शुरू करने से पहले कानून की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कई बातें कही गई हैं-
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- वारंट जारी करना- आरोपी को पेश होने के लिए 30 दिनों के अंतराल पर दो लगातार गिरफ्तारी वारंट जारी किए जाते हैं।
- सार्वजनिक सूचना- आरोपी को पेश होने का अवसर देने के लिए एक स्थानीय या राष्ट्रीय समाचार पत्र में सूचना प्रकाशित की जाती है।
- 90 दिनों की प्रतीक्षा अवधि- आरोप तय होने के 90 दिनों के बाद ही अनुपस्थिति में मुकदमा शुरू किया जा सकता है।
- कानूनी प्रतिनिधित्व- यदि फरार आरोपी के पास वकील नहीं है, तो अदालत को राज्य के खर्च पर उसके लिए एक वकील नियुक्त करना होगा।
- इस कानून के फायदे
- देरी पर रोक- यह प्रावधान जानबूझकर न्याय से बचने वाले अपराधियों के कारण होने वाले मुकदमे की देरी को रोकता है।
- भगोड़ों पर कार्रवाई- सरकार का मानना है कि इस कदम से ऐसे अपराधियों को दोषी ठहराने में मदद मिलेगी, जिससे उनके प्रत्यर्पण की संभावना बढ़ेगी।
- सक्षम कार्यवाही- अनुपस्थिति में सुनवाई के बाद दोषी करार दिए गए अपराधी के खिलाफ कानूनी कार्यवाही जारी रखी जा सकती है।
जेलों से भी वे रंगदारी रैकेट चला रहे
अपराध शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि करीब दो दशक पहले दिल्ली में किशन पहलवान, नीतू दाबोदिया, अशोक प्रधान आदि कुछ गिने-चुने ही बड़े बदमाश होते थे। उस वक्त रंगदारी व संगठित अपराध इतने नहीं थे। इस समय दिल्ली, पंजाब, हरियाणा व राजस्थान के करीब 100 से अधिक बड़े गैंग्स्टर सक्रिय हैं। इनके गिरोह देश व विदेश से लोगों को फोन कर रंगदारी मांग रहे हैं। बड़ी संख्या में गैंग्स्टर दिल्ली व पड़ोसी राज्यों के जेलों में बंद हैं। जेलों से भी वे रंगदारी रैकेट चला रहे हैं। राजधानी में कई ऐसी घटनाएं हुईं, जिनमें गैंग्स्टर व पुलिस के गठजोड़ का मामला सामने आया।









