महेश जोशी- सुसाइड केस लालकुआं: DM-SDM तो बाद की बात है, हमें तो…?- ग्रामीण, बेबस नजर आए क्षेत्रीय विधायक

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लालकुआं क्षेत्र के समाजसेवी एवं प्रॉपर्टी डीलर महेश जोशी की बरेली राममूर्ति अस्पताल में सोमवार को मौत हो गई। संदिग्ध परिस्थितियों में तहसील में जहर खाकर आत्महत्या के प्रयास के बाद उन्हें बरेली रेफर किया गया था। उनकी मौत के बाद सोमवार को लालकुआं में स्थानीय निवासियों ने परिवारजनों के साथ कोतवाली के बाहर शव रखकर जोरदार प्रदर्शन किया। आक्रोशित लोग पटवारी पूजा रानी की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े थे, जिनका नाम मृतक जोशी सुसाइड नोट में लिखकर छोड़ गए थे। देर शाम मुकदमा दर्ज करने और पटवारी की गिरफ्तारी का वीडियो कॉल पर दृश्य दिखाए जाने के बाद ग्रामीण शव उठाने को राजी हुए।

प्रदर्शन के दौरान यहां क्षेत्रीय विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट पहुंचे। वे। उन्होंने मौके से अधिकारियों को फोन लगाकर कड़ी नाराजगी जताई। डॉ. बिष्ट बोले, जिम्मेदार आदमी को यहां होना चाहिए, मैं तक आ गया हूं, जिले में कोई अधिकारी नहीं है क्या, जो भी इसमें बात करनी है ऊपर बात करिए…। इसके बाद विधायक ग्रामीणों से रूबरू हुए तो मृतक की एक महिला परिजन रोते हुए कहने लगी, इतनी जनता आ गई है, इतने लोग इकट्ठा हो गए हैं, मगर पटवारी को नहीं ला पा रहे हैं, सरकार कुछ नहीं कर पा रही है। इस पर विधायक बोले, आपकी आवाज में हूं, आपका प्रतिनिधि हूं, मैं दिलाऊंगा न्याय। विधायक डॉ. मोहन सिंह बिष्ट का कहना है कि पूर्व में भी आरोपी पटवारी के खिलाफ कई शिकायतें आई थीं। तहसील दिवस के दिन एसडीएम से लापरवाही पर उक्त का वेतन रोकने के लिए भी कहा था।। महिला पटवारी के खिलाफ जांच कर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
पहले पूजा रानी चाहिए…
प्रदर्शन के दौरान जब पुलिस अधिकारी ग्रामीणों को समझाने लगे और कहने लगे कि यहां सक्षम अधिकारी आ रहे हैं, तो भड़के ग्रामीण कहने लगे कि डीएम, एसडीएम तो बाद की बात है, हमें पहले पूजा रानी चाहिए। हम लोग शव लेकर राममूर्ति से यहां पहुंच गए मगर प्रशासन पटवारी को यहां तक नहीं ला पा रहा है।

मेरे पापा भी यहीं हैं, मैं भी…
धरनास्थल पर मृतक की छोटी बेटी दीक्षा रोते हुए पापा को याद कर कहने लगी कि पापा को इंसाफ चाहिए, जिसने उनका यह हाल किया मैं उनका नाम भी अपने मुंह से नहीं लेना चाहती। किसका बुरा किया मेरे पापा ने, सबका अच्छा ही किया। मगर मेरे पापा की क्या हालत कर दी आज… बुमश्किल उन्हें परिजन संभालते रहे।

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