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असम की बेसहारा नाबालिग बच्ची को बंधक बनाने, दुष्कर्म करने और देह व्यापार में धकेलने का मामला सामने आया है। मामला अक्तूबर माह का है। पुलिस ने महिला सहित दो आरोपियों को गिरफ्तार कर 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। डीएसपी अनूप के नेतृत्व में गठित एसआईटी पूरे मामले की जांच कर रही है। मामले में लिप्त रहे एक हैड कांस्टेबल की भूमिका की भी जांच की जा रही है।
पुलिस के मुताबिक औद्योगिक क्षेत्र थाने में 13 अक्तूबर को एक नाबालिग बच्ची आई और बताया कि वह असम की रहने वाली ही। मां की सात-आठ साल पहले मौत हो गई थी। करीब 5 साल पहले पिता भी बिना बताए घर छोड़कर चले गए। करीब दो साल पहले वह असम से काम की तलाश में भिवानी आ गई। यहां एक युवक उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया और मंदिर में शादी कर ली। शादी के बाद से ही वह उसे पीटता था और घर से बाहर नहीं निकलने देता था।
करीब 5 माह पहले वह घर से भागकर रेलवे स्टेशन पर आ गई। यहां ममता नाम की महिला के साथ उसका झगड़ा हो गया। पुलिस उसे अपने साथ चौकी ले गई और दोनों में समझौता करवा दिया। उसे अकेला पाकर थाने में तैनात हैड कांस्टेबल ने अपने परिचित शंकर को बुलाया और उसे अपने गेस्ट हाउस में रात भर ठहराने और अगली सुबह भेज देने का कहा। आरोप है कि शंकर ने उसे अगले दिन गेस्ट हाउस से जाने नहीं दिया। उसके साथ दुष्कर्म किया।
इतना ही नहीं करीब साढ़े तीन माह तक बंधक बनाकर और लोगों से भी उसका यौन शोषण करवाया। करीब डेढ़ माह पहले वह गेस्ट हाउस से भागकर वापस असम चली गई। वहां उसे किसी ने नहीं स्वीकार तो वापस भिवानी आ गई। यहां से काम की तलाश में बस से रोहतक जा रही थी। बस में उसे रोहतक निवासी अंजलि पत्नि रजनीश मिली। वह उसे अपने घर ले गई और वहीं बंधक बना लिया।
उसने भी उससे गलत काम करवाया। वह 11 अक्तूबर को किसी तरह भिवानी पहुंची और दो दिन बाद पुलिस तक पहुंची। पुलिस ने शंकर, अंजलि व अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। दोनों नामजदों को गिरफ्तार कर अदालत में पेश किया। इस मामले में संलिप्त पाए गए पुलिसकर्मी के खिलाफ जांच की जा रही है। बच्ची को बाल कल्याण समिति करनाल को सौंप दिया है।
पुलिस की लापरवाही पर एनएचआरसी को शिकायत
हरियाणा राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग के पूर्व सदस्य सुशील वर्मा ने पूरे मामले में पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) के सदस्य प्रियंक कानूनगो को शिकायत देकर स्वतंत्र एजेंसी से जांच की मांग की है। वर्मा ने आरोप लगाया कि हेडकांस्टेबल ने बच्ची को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सामने पेश करने के बजाय अपने परिचित शंकर के हवाले कर दिया। उसने बच्ची को बाल संरक्षण अधिकारी तक नहीं पहुंचाया और न ही वरिष्ठ अधिकारियों को सूचित किया। उसे निलंबित किया जाना चाहिए। शंकर और अंजलि के अलावा मानव तस्करी के पूरे नेटवर्क की जांच हो।
पुलिस जांच पर सवाल
- बच्ची से शादी कर उसे बंधक बनाकर रखने के आरोपी की गिरफ्तारी को लेकर अब तक क्यों कार्रवाई नहीं हुई।
- गेस्ट हाउस में साढ़े तीन महीने तक बच्ची का यौन शोषण करने में कौन-कौन लोग शामिल रहे?
- हेड कांस्टेबल की भूमिका के बावजूद उसके खिलाफ कार्रवाई का दायरा सीमित क्यों रहा?
- बच्ची को सीडब्ल्यूसी के हवाले करने के बजाय गेस्ट हाउस तक पहुंचाने का निर्णय किसने लिया? क्या जनरल डायरी, ड्यूटी रजिस्टर और डायल 112 की रिकॉर्डिंग की जांच हुई?
अधिकारी के अनुसार
असम निवासी नाबालिग लड़की के मामले में गेस्ट हाउस संचालक और रोहतक की महिला को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। पुलिसकर्मी की भूमिका को लेकर विभागीय जांच कर रहे हैं। बच्ची की काउंसलिंग करवा बाल कल्याण समिति के सुपुर्द कर दिया है। – मयंक मिश्रा, पुलिस अधीक्षक, भिवानी।