विपक्ष के विरोध और चुनाव आयोग को लेकर जारी सियासी घमासान के बीच केंद्र सरकार संसद का विशेष सत्र बुलाने की तैयारी में है। सूत्रों के मुताबिक, इसी महीने के आखिरी दिनों में संसद का विशेष सत्र बुलाया जा सकता है। इस दौरान परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर चर्चा और उन्हें पारित कराने की कोशिश हो सकती है। सरकार से जुड़े सूत्रों का दावा है कि लोकसभा में इन विधेयकों को पास कराने के लिए उसके पास पर्याप्त संख्या बल है।
इन दिनों मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर को लेकर विपक्ष लगातार सवाल उठा रहा है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर भी विरोध तेज है। विपक्ष चुनाव प्रक्रिया और उससे जुड़े फैसलों पर सरकार को घेर रहा है। इसी राजनीतिक खींचतान के बीच संसद के विशेष सत्र की संभावित तैयारी ने सियासी हलचल बढ़ा दी है। हालांकि, सत्र की तारीख और उसके एजेंडे को लेकर अभी आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
परिसीमन का सीधा संबंध लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाएं तय करने से है। इसके तहत निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं और प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। ऐसे में यह मुद्दा केवल चुनावी नक्शे तक सीमित नहीं है, बल्कि देश की राजनीतिक तस्वीर पर भी असर डाल सकता है। इसीलिए परिसीमन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच बहस तेज होने की संभावना है।
महिला आरक्षण को लेकर भी अहम कदम संभव
महिलाओं को विधायिका में ज्यादा प्रतिनिधित्व देने के उद्देश्य से महिला आरक्षण का मुद्दा भी इस संभावित सत्र के केंद्र में रह सकता है। इससे जुड़े संवैधानिक संशोधन विधेयकों पर सरकार आगे बढ़ती है, तो संसद में नई राजनीतिक बहस छिड़ सकती है। हालांकि, इन प्रस्तावों का अंतिम स्वरूप और उन्हें लागू करने की समयसीमा क्या होगी, यह विधेयकों के आधिकारिक विवरण से ही स्पष्ट होगा।
मानसून सत्र का अब तक नहीं हुआ है समापन
बता दें कि संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को खत्म हो गया था, लेकिन उसका सत्रावसान अभी नहीं हुआ है। मतलब कि सत्र खत्म जरूर हुआ है, पर उसे औपचारिक रूप से बंद नहीं किया गया है। इसी वजह से विशेष बैठक बुलाने का रास्ता खुला हुआ है। सरकार फिलहाल सत्र की तारीखें और कार्यक्रम तय करने में लगी है।
16 अप्रैल को सरकार ने पेश किया था परिसीमन बिल
बता दें कि सरकार ने बजट सत्र के दौरान 16 अप्रैल 2026 को संसद भवन में परिसीमन बिल पेश किया था। हालांकि विपक्ष के विरोध और सरकार के पास पर्याप्त वोट न होने के कारण यह बिल 17 अप्रैल को लोकसभा में गिर गया था। ऐसे में अब सरकार उसी मुद्दे पर दोबारा कोशिश करने की तैयारी में दिख रही है।
सरकार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लोकसभा में विधेयकों को पारित कराने के लिए जरूरी समर्थन उसके पास है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि विशेष सत्र बुलाने को लेकर सरकार कब औपचारिक एलान करती है और विपक्ष इस पर क्या रुख अपनाता है। अगर सत्र इसी महीने बुलाया जाता है, तो परिसीमन और महिला आरक्षण आने वाले दिनों में संसद की राजनीति के सबसे अहम मुद्दों में शामिल हो सकते हैं।







