घरेलू सहायकों के रूप में घरों में घुसकर विश्वास जीतना और मौका मिलते ही परिवार को नशीला पदार्थ खिलाकर चोरी-लूट करने वाले गिरोह की वारदातें देश के कई शहरों में सामने आ चुकी हैं। हैदराबाद, राजस्थान, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के बाद अब देहरादून में भी इसी तरह की वारदात सामने आने से पुलिस के सामने इस गिरोह के नेटवर्क की पड़ताल की चुनौती खड़ी हो गई है। जांच में सामने आया है कि कई मामलों में वारदात के बाद आरोपी सीधे नेपाल भागने की कोशिश करते हैं।
जयपुर के वैशाली नगर में मई 2025 में नेपाली नौकर दंपती पर साथियों के साथ मिलकर चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर परिवार को बेहोश करने और पांच करोड़ रुपये से अधिक के गहने-नकदी लूटने का आरोप लगा था। जोधपुर में एक नामी हैंडीक्राफ्ट कारोबारी के घर करीब 10 करोड़ रुपये की चोरी में सात नेपाली आरोपियों की भूमिका सामने आई थी। इनमें चार घर के पुराने नौकर थे, जिन्होंने तीन साथियों को नेपाल से बुलाया था।
मेरठ में भी करीब 80 लाख रुपये की चोरी के बाद आरोपी फरार
दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और बेंगलुरु तक भी ऐसे गिरोहों की गतिविधियां सामने आती रही हैं। भीम बहादुर जोरा पर सोशल मीडिया के जरिये भारत के अलग-अलग शहरों में काम कर रहे नेपाली नौकरों से संपर्क कर उनके मालिकों के घरों में चोरी-डकैती कराने के आरोप लगे थे। मेरठ में भी करीब 80 लाख रुपये की चोरी के बाद आरोपी नेपाल भाग गए थे। मुख्य आरोपी को पुलिस ने करीब चार साल बाद सोशल मीडिया के जरिए जाल बिछाकर गिरफ्तार किया था।
दून की घटना में भी नेपाली नौकर पर परिवार को नशीला पदार्थ खिलाकर घर खंगालने का आरोप है। इन वारदातों में एक समान तरीका सामने आता है। आरोपी पहले लंबे समय तक ईमानदारी से काम कर मालिक का भरोसा जीतते हैं। इसके बाद मौका देखकर खाने या चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर परिवार को बेहोश करते हैं। बड़ी वारदात के लिए नेपाल से साथियों को बुलाने और फर्जी नाम-पते से पहचान छिपाने की बात भी कई मामलों की जांचत में सामने आई है।








