तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों ने एनसीपीआई में विलय की घोषणा तो कर दी है, मगर भविष्य के सवाल पर उनके बीच खाई चौड़ी हो रही है। इनमें शामिल तीन मुस्लिम सांसद राजग में शामिल होने के बदले उसे मुद्दागत समर्थन देने के पक्ष में हैं। इसके इतर आधा दर्जन सांसदों की इच्छा है कि एनसीपीआई की जगह भविष्य में भाजपा में विलय की दिशा में आगे बढ़ा जाए।
तीनों सांसदों ने उनसे धार्मिक स्वतंत्रता की सुरक्षा की मांग करते हुए पश्चिम बंगाल, में मस्जिदों से लाउड स्पीकर हटाने और मतदाता ट्रिब्यूनल के लंबित मामलों का जल्द निपटारा न करने पर चिंता जाहिर की। तीनों सांसदों ने कहा कि अरसे से देश के वैध नागरिक ट्रिब्यूनल के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
नेतृत्व के कारण उलझन
दरअसल बागी गुट में नेतृत्व को लेकर भी उलझन की स्थिति है। पार्टी में नेतृत्व विरोधी मुहिम की अगुवाई काकोली दस्तीदार ने की थी। बाद में शताब्दी रॉय इस मुहिम से जुड़ीं। फिर अंत में सुदीप बंदोध्याय भी विरोधी गुट में शामिल हुए। अब एनसीपीआई में विलय के बाद इस गुट में असली नेतृत्व पर भी अंदरखाने मतभेद की स्थिति है।
दरअसल बागी गुट में नेतृत्व को लेकर भी उलझन की स्थिति है। पार्टी में नेतृत्व विरोधी मुहिम की अगुवाई काकोली दस्तीदार ने की थी। बाद में शताब्दी रॉय इस मुहिम से जुड़ीं। फिर अंत में सुदीप बंदोध्याय भी विरोधी गुट में शामिल हुए। अब एनसीपीआई में विलय के बाद इस गुट में असली नेतृत्व पर भी अंदरखाने मतभेद की स्थिति है।






