बड़ा खुलासा: किराये की कोख का झांसा देकर थमाते थे खरीदा गया बच्चा, IVF तकनीक के नाम पर वसूलते मोटी रकम

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वजात बच्चों की तस्करी कर खरीद-फरोख्त मामले की जांच में पता चला है कि आरोपी बच्चों की चाह रखने वाले दंपती को आईवीएफ तकनीक का झांसा देकर उनको बच्चे उपलब्ध करवाया जाता था। इन दंपतियों को किराए की कोख (सरोगेसी) से बच्चा पैदा करवाने का झांसा दिया जाता था।

नौ महीने बकायदा आईवीएफ के नाम पर दंपती से मोटी रकम वसूली जाती थी। बाद में उनको खरीदा गया बच्चा, दंपती का अपना बच्चा बताकर दे दिया जाता था। ऐसे ही एक मामले का खुलासा ऋषिकेश से एक महिला की गिरफ्तारी के बाद खुला है।

पुलिस ने सोमवार को ऋषिकेश में छापेमारी कर एक और बच्चे को बरामद कर 32 साल की महिला को गिरफ्तार किया है। महिला इस बात से पूरी तरह अनजान थी कि उसके पास बच्चा उसका नहीं बल्कि उसे खरीदकर सौंपा गया है। पुलिस की पूछताछ में महिला ने खुलासा किया है कि उसकी शादी को 12 साल हो चुके थे। शादी के कुछ दिनों बाद उसके पति को पैरालाइज हो गया था। परिवार को बच्चे की चाहत थी। एक रिश्तेदार ने उनको डॉ. विवेकी का पता दिया। महिला परिवार के साथ डॉ. विवेकी से मिली।

विवेकी ने आईवीएफ तकनीक से बच्चा पैदा होने का आश्वासन दिया। डॉ. विवेकी ने योजना के तहत करीब 9 माह तक महिला और उसके पति को इलाज के नाम पर अपने अस्पताल बुलाया। उनको अश्वासन दिया गया कि किराए की कोख में उनका बच्चा पल रहा है। बाद में 4 जून को कागजी कार्रवाई कर महिला को उसका अपना बच्चा बताकर खरीदा हुआ बच्चा थमा दिया गया। पुलिस ने सोमवार को जब महिला को गिरफ्तार किया।

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पुलिस ने महिला को कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इससे पूर्व पुलिस ने शनिवार को रोहिणी में छापेमारी कर गरिमा जैन (37) और इसके ससुर सतीश जैन (70) को गिरफ्तार कर इनके पास से एक खरीदा गया नवजात बरामद किया। गरिमा का पति प्रवेश जैन फरार है। इन्होंने डॉ. विवेकी से 9.30 लाख रुपये में बच्चा खरीदा था।

पुलिस ने इनको भी अदालत में पेश किया, जहां से इनको जेल भेज दिया गया। मध्य जिला के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि मामले में अब तक 7 बच्चों को बरामद 16 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। इनमें अस्पताल की मालिक डॉ.विवेकी और बाकी लोग भी शामिल हैं। पुलिस ने बिहार, आगरा, दिल्ली-एनसीआर में बेचे गए कुछ बच्चों का पता लगाया है।

बता दें कि 18 जून को मध्य जिला के स्पेशल स्टाफ ने अंतरराज्जीय नवजात बच्चों की तस्करी कर उनके सौदा करने वाले गिरोह का खुलासा किया था। मामले में उस दिन 5 नवजात बच्चों को बरामद कर कुल 13 लोगों को गिरफ्तार किया था।

पुलिस ने 18 जून को नवजात बच्चों की तस्करी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश कर दिल्ली के निजी अस्पताल की संचालिका समेत 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से पांच नवजातों को बरामद किया गया। जांच में सामने आया कि गिरोह डेढ़ साल में विभिन्न राज्यों में 30 बच्चों को बेच चुका है। आरोपी राजस्थान और गुजरात के गरीब परिवारों को लालच देकर महज 10 से 15 हजार रुपये में उनके बच्चे खरीद कर बेऔलाद दंपतियों को 5 से 10 लाख रुपये में बेचते थे। गिरोह के तार दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, मध्य प्रदेश और गुजरात से जुड़े हैं।

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नवजात बच्चों का सौदा करने में प्रतिभा अहम भूमिका अदा करती थी। हीरा मल्टीस्पेशियलिटी अस्पताल के अलावा दिल्ली-एनसीआर के कई आईवीएफ सेंटर और अस्पतालों से इसके संपर्क थे। प्रतिभा ऐसे दंपती की तलाश करती थी, जिनके यहां बच्चे पैदा नहीं हो पा रहे थे। इसके अलावा ऐसे परिवारों की तलाश की जाती थी, जिनके यहां बेटी ही है। अस्पताल के जरिए ऐसे परिवारों तक पहुंच बनाने के उनको 3-4 दिन का नवजात बच्चा, वह भी पूरी कानूनी प्रक्रिया के तहत देने का दावा कर तैयार कर लिया जाता था। बदले में उनसे मोटी रकम वसूली जाती थी।


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