ऑपरेशन सिंदूर: भारत के एयर ऑपरेशन के सामने कमजोर साबित हुआ PAK का रक्षा नेटवर्क, रिपोर्ट में बड़ा खुलासा

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भारत का ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण था कि पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था उतनी मजबूत नहीं निकली जितना दावा किया जाता था। एक रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछले साल भारत के ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, जब पाकिस्तान के रक्षा प्रणालियों को रियल-टाइम टारगेटिंग, एकीकृत वायु रक्षा और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध के विरुद्ध परखा गया तो वे उम्मीदों पर खरे नहीं उतरे।

 

अफगान डायस्पोरा नेटवर्क की रिपोर्ट में कहा गया कि आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम से यह उम्मीद नहीं होती कि वह हर हमला रोक दे, लेकिन उससे कम से कम अहम सैन्य ठिकानों को बार-बार और एक साथ होने वाले हमलों से बचाने की उम्मीद जरूर की जाती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान ऐसा करने में नाकाम रहा। रिपोर्ट में बताया गया कि भारतीय हमलों से पाकिस्तान के एयरफील्ड, हैंगर और रडार सिस्टम को काफी नुकसान पहुंचा।

रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान का एचक्यू-9 लंबी दूरी वाला सतह से हवा में मार करने वाला मिसाइल सिस्टम भी उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाया। इसे चीन के एक हाई-एंड सिस्टम के तौर पर पेश किया गया था, जो पश्चिमी और रूसी सिस्टम को टक्कर देने वाला माना जाता था। माना जा रहा था कि यह भारतीय एयर ऑपरेशंस को मुश्किल बना देगा और रणनीतिक एयर बेस की रक्षा करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

पाकिस्तान और चीन ने मिलकर विकसित किया जेएफ-17 मल्टीरोल फाइटर विमान भी कमजोर साबित हुआ। रिपोर्ट में कहा गया कि यह भारतीय हमलों को संवेदनशील सैन्य ठिकानों तक पहुंचने से नहीं रोक पाया। साथ ही शुरुआती हवाई लड़ाई के बाद भारतीय एयरबेस को किसी बड़े नुकसान का कोई साफ सबूत भी सामने नहीं आया। रिपोर्ट में कहा गया, जिस विमान को पाकिस्तान की सस्ती और मजबूत एयर पावर की रीढ़ बताया जाता था, उसके लिए यह प्रदर्शन भरोसा बढ़ाने वाला नहीं था।

जे-10सी लड़ाकू विमान और पीएल-15 लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइल के बारे में भी रिपोर्ट में कहा गया कि इनके किसी बड़े सामरिक सफलता के पक्के सबूत नहीं मिले। पाकिस्तान की तरफ से किए गए दावों को समर्थन देने वाला कोई ठोस सबूत अंतरराष्ट्रीय मीडिया में साझा नहीं किया गया।

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रिपोर्ट में कहा गया कि जे-10सी की कथित रणनीतिक सफलता अब तक बड़े निर्यात में नहीं बदली है। पेंटागन की 2025 की चीन सैन्य रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा गया कि पाकिस्तान अभी तक जे-10सी का इकलौता विदेशी ग्राहक बना हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान लंबे समय से चीनी सैन्य उपकरणों के परीक्षण के लिए एक भरोसेमंद प्रयोगशाला की तरह काम करता रहा है, और उनकी कमियों का असर भी उसे ही झेलना पड़ा है।

रिपोर्ट में कहा गया कि पाकिस्तान के सैन्य उपकरणों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार भरोसे की कमी का सामना करना पड़ रहा है। ऑपरेशन सिंदूर ने सिर्फ कुछ सिस्टम को नुकसान नहीं पहुंचाया, बल्कि पाकिस्तान के इस दावे को भी कमजोर कर दिया कि उसकी रक्षा व्यवस्था पूरी तरह भरोसेमंद और युद्ध के लिए तैयार है।


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