पश्चिम बंगाल में इसी महीने होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले सियासी घमासान चरम पर है। इसी बीच अब विशेष गहण पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने सोमवार को साफ-साफ कहा कि जिन लोगों के नाम मतदाता सूची से हटाए जाने के खिलाफ अपील लंबित है, उन्हें आगामी पश्चिम बंगाल चुनाव में मतदान करने की अनुमति नहीं दी जा सकती। राज्य में चल रहे एसआईआर विवाद के बीच सर्वोच्च न्यायालय का यह फैसला चुनावी राजनीति में बड़ा मोड़ माना जा रहा है, जिससे पार्टियों के बीच टकराव और तेज हो सकता है।
अब तक 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर की गई
सर्वोच्च न्यायालय के इस फैसले के बाद राज्य में करीब 34 लाख वोटर के मतदान करने पर तलवार लटकती हुई नजर आने लगी है। बता दें कि यह पूरा मामला राज्य में चल रही वोटर लिस्ट की विशेष गहन समीक्षा (एसआईआर) से जुड़ा है। जिन लोगों के नाम लिस्ट से हटाए गए, उन्होंने इसके खिलाफ अपील की है। अब तक करीब 34 लाख से ज्यादा अपीलें दायर हो चुकी हैं।
मामले में कोर्ट की अहम टिप्पणी
कोर्ट ने कहा-
- जिनकी अपील अभी लंबित है, उन्हें वोट देने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
- अगर अपील तय होकर नाम जुड़ जाता है, तभी वोट देने का अधिकार मिलेगा।
- इससे अपीलीय ट्रिब्यूनल पर अनावश्यक दबाव नहीं पड़ेगा
याचिकाकर्ता के वकिल ने क्या कहा?
वहीं याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कल्याण बंदोपाध्याय ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लोग कोर्ट से उम्मीद रखते हैं और यह धारणा बन रही है कि सभी मामलों का निपटारा हो चुका है, जबकि ऐसा नहीं है। गौरतलब है कि इसी सुनवाई के दौरान राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मालदा जिले की घटना पर स्टेटस रिपोर्ट पेश की। जहां 1 अप्रैल को वोटर लिस्ट से नाम हटने के विरोध में प्रदर्शनकारियों ने कई न्यायिक अधिकारियों का घंटों घेराव किया था। इसपर कोर्ट ने एनआईए से यह भी पूछा कि गिरफ्तार लोगों का कोई राजनीतिक संबंध है या नहीं।






