फरीदाबाद में पंक्चर की दुकान खोले बैठा था पाकिस्तानी जासूस, बिहार का रहने वाला है नौशाद अली

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ल फलाह यूनिवर्सिटी से सामने आए टेरर मॉड्यूल को लोग अभी भूले भी नहीं थे कि स्मार्ट सिटी फरीदाबाद से आतंकवाद का नया कनेक्शन सामने आया है। इस बार गाजियाबाद से सामने आए देशभर में जासूसी व रेकी करने वाले गिरोह का कनेक्शन फरीदाबाद से जुड़ा है। गाजियाबाद पुलिस की एसआईटी ने फरीदाबाद के तिगांव थाना इलाके के नचौली गांव में लगभग 4 महीने से रह रहे 20 साल के नौशाद अली उर्फ लालू को गिरफ्तार किया है। पुलिस प्रवक्त यशपाल ने बताया कि युवक यूपी पुलिस की हिरासत में है।

 

कहने को टायर पंक्चर की दुकान
20 साल का नौशाद अली उर्फ लालू कहने को तो टायर पंक्चर की दुकान चला रहा था लेकिन असल में पाकिस्तानी हैंडलर के लिए जासूसी कर रहा था। भूपानी इलाके में कुछ महीने पहले खुले पेट्रोल पंप के पास ही नौशाद ने कुछ दिन पहले ही पंक्चर की दुकान खोली थी। 18 मार्च को गाजियाबाद एसटीएफ की टीम उसे पकड़कर ले गई थी। 20 मार्च को नौशाद के पिता जलालूद्दीन ने भूपानी थाना गुमशुदगी की शिकायत दी गई। शिकायत में एक गाड़ी का नंबर भी दिया गया जिसमें उसे ले जाया गया। पुलिस ने तलाश की तो पता चला कि गाजियाबाद पुलिस की टीम ने जासूसी मामले में पकड़ा है।

सोशल मीडिया से गिरोह से जुड़ा
आरोपी से शुरुआती पूछताछ में खुलासा हुआ है कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिये वो इस गिरोह से जुड़ा था। सीधे तौर पर पाकिस्तान में बैठे हैंडलर के संपर्क में था। पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर वो देश के विभिन्न स्थानों पर स्थित सुरक्षाबल के ठिकानों व अन्य महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों, रेलवे स्टेशन आदि की रैकी कर चुका है। रेकी के दौरान लिए गए फोटो, वीडियो के साथ ही जीपीएस लोकेशन भी पाकिस्तान हैंडलर के बताए गए विदेशी नंबरों पर भेज चुका है। इसके लिए उसके मोबाइल में प्ले स्टोर से एप डाउनलोड कराकर हैंडलर ने उसे ट्रेनिंग भी दिलाई थी।

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गिरोह में भर्ती कर रहा था नौशाद
अपराध शाखा के आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि फरीदाबाद से पकड़ा गया नौशाद ही इस गिरोह के लिए अब सबसे अहम तौर पर काम कर रहा था। पहले वो रैकी करने के बाद अब पाकिस्तानी हैंडलर के कहने पर अपनी तरह के अन्य जासूसों की भर्ती का काम करने लगा था। मामले में एक अन्य गिरफ्तार महिला मीरा को उसने ही सोशल मीडिया के जरिये संपर्क कर गिरोह से जोड़ा था। वो कम उम्र के लड़कों खासकर वो जिन्हें तकनीकी ज्ञान हो, उनकी गरीबी का फायदा उठाकर रुपयों का लालच देकर गिरोह से जोड़ रहा था। सोशल मीडिया के ग्रुप्स में जुड़कर वो ऐसे युवाओं को ढूंढता था जिनका पुराना कोई आपराधिक रेकॉर्ड न हो। महिलाओं को भी वो गिरोह में रुपयों का लालच देकर जोड़ रहा था, ताकि उस पर कोई शक न करे।


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